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Monday, September 26, 2022

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कला जगत की गतिविधियां पूर्व व्रत प्रारंभ होने के लिए व्यापक प्रयासों की आवश्यकता

21 मई-फरीदाबाद | कोरोना महामारी के बाद स्थितियां सामान्य होने की ओर है। देश अपने सामूहिक प्रयासों से इस महामारी को सफलतापूर्वक पराजित कर रहा है। कलासाधकों ने इस महामारी की कठिन घड़ी में देश समाज का मनोबल बढ़ाया था। स्वयं की आजीविका पर संकट होते हुए भी कलासाधकों ने अपनी कलाओं का उपयोग महामारी को हराने में किया। समाज जागरण के लिए कहीं सामाजिक संदेश देने वाले गीत लिखे गए तो कहीं अलग अलग प्रकार के वीडियोस बनाए गए। लॉकडाउन की स्थिति में विभिन्न विधाओं की आवासीय ऑनलाइन कलात्मक गतिविधियों के द्वारा समाज में फैली नकारात्मकता को दूर करने का प्रयास किया गया। इस महामारी से लड़ने में कला जगत ने कलासाधकों के माध्यम से अपने सामाजिक उत्तरदायित्व को निभाया।

 महामारी और उससे जनित लॉकडाउन के चलते कला जगत भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। मंचीय प्रस्तुति एवं अन्य कार्यक्रम बंद होने के कारण समाज जीवन को दिशा प्रदान करने वाले कलासाधकों के सामने जीवन यापन एवं जीवन रक्षा का संकट खड़ा हो गया। इसमें विशेष रूप से अन्यान्य परिवारिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति देने वाले कलासाधक, घुमंतू कलासाधक, जनजातीय कलासाधक, लोक कलासाधक, गांव की कीर्तन मंडली या मंदिरों में प्रस्तुतियां देने वाले कलासाधक एवं नाट्य समूह आदि प्रभावित हुए। नगरों में रहने वाले स्थापित कलासाधक भी इस महामारी के प्रभाव से बच नहीं पाए।

संस्कार भारती की अखिल भारतीय प्रबंधकारिणी का मत है कि महामारी की सामान्य होती स्थिति के बीच कलासाधकों के लिए भी अवसर पूर्व वक्त शुरू हो। आवासीय कार्यक्रमों की उपयोगिता को भी स्वीकार करते हुए प्रत्यक्ष कार्यक्रमों के आयोजन पर विशेष बल दिया जाए। सांस्कृतिक गतिविधियां महामारी पूर्व की स्थिति में आ सके और कलासाधक एक बार फिर से कला के माध्यम से राष्ट्र आराधना कर सके इसके लिए सार्थक प्रयासों की आवश्यकता होगी।

स्थानगांव में लगने वाले छोटे बड़े मेले एवं स्थान पर होने वाले महोत्सव का आयोजन पूर्व व्रत प्रारंभ हो। गांव-स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रम जिनमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोक कलासाधक, विभिन्न प्रकार के हस्तकला उद्योग को प्रदर्शित करने वाले कलासाधक, जनजातीय कला साधक, आदि अवसर पाते थे इनके आयोजन का क्रम पुनः प्रारंभ हो। इससे एक और कला प्रदर्शन में दर्शकों श्रोताओं का प्रत्यक्ष प्रतिसाद कलासाधक को संबल प्रदान करेगा, वहीं उन्हें आजीविका की चिंता से भी सहायक होगा।

 कला साधक के अस्तित्व की रक्षा आज की प्रमुख आवश्यकता है। नवोदित कलाकारों को उचित अवसर एवं साधन प्रदान किए जाने की भी आवश्यकता है। इस दृष्टि से लंबे समय से रुकी हुई छात्रवृत्ति, फेलोशिप पुरस्कार, सम्मान पेंशन, आकाशवाणी कार्यक्रम आदि कार्यक्रम तथा कला छात्रों के लिए कार्य शालाओं का आयोजन भी पुनः शीघ्र प्रारंभ हो। लंबे समय से कला संस्थानों में रिक्त पदों को अविलंब भरा जाए। इस दृष्टि से गत दिनों कुछ कार्य हुए हैं। यह प्रबंधकारिणी इन कार्यों का स्वागत करती है।

 देश अपनी स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ मना रहा है। यह समय अपने गौरवपूर्ण इतिहास के स्मरण का है। स्वाधीनता का अमृत महोत्सव कला साधकों को कला प्रस्तुतियों के माध्यम से नव जीवन प्रदान करें ।

यह प्रबंधकारिणी केंद्र शासन एवं सभी राज्य शासनों और कला संस्थानों से आवाहन करती है कि उपर्युक्त बिंदुओं पर प्राथमिकता से यथोचित कार्य करते हुए कला जगत के उन्नयन का प्रयास करें। प्रबंधकारिणी अपने सभी कार्यकर्ताओं से आवाहन करती है कि कोरोना काल में रुका नियमित कार्यक्रमों का क्रम तथा अमृत महोत्सव के विशेष आयोजन शीघ्रता से प्रारंभ हो। हमारे समन्वित प्रयासों से कला जगत अपनी पूर्ण क्षमता से संस्कृति को अभिव्यक्त करने का कार्य पुनः कर सकेगा ऐसा विश्वास है।।

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