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Thursday, July 7, 2022

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चिंताजनक : देश का सबसे तीसरा प्रदूषित शहर रहा फरीदाबाद

02 नवम्बर – फरीदाबाद : स्मार्ट सिटी फरीदाबाद सोमवार को देश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर बना रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जारी वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में फरीदाबाद का एक्यूआई 327 रहा। यह बेहद खराब श्रेणी में आता है। जबकि गाजियाबाद 363 सूचकांक के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। प्रदूषण बढ़ने से दिवाली पहले ही स्मार्ट सिटी फरीदाबाद की अबोहवा छह गुणा से अधिक प्रदूषित हो गई है। बीते वर्ष दिवाली जैसे हालात इस बार भी हैं। बीते साल दिवाली से चार दिन पहले स्मार्ट सिटी का एक्यूआई 327 रहा था, जो सोमवार को इसी स्तर पर दर्ज किया गया।बल्लभगढ़ बना रहा अक्तूबर में 10 देश का सबसे प्रदूषित शहर

अक्तूबर के महीने में 10 दिन बल्लभगढ़ देश सबसे प्रदूषित शहर बना रहा। इस दौरान बल्लभगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब या बेहद खराब श्रेणी में 300 के आसपास या इससे अधिक रहा। सबसे अधिक 30 अक्तूबर को एक्यूआई 380 दर्ज किया गया। अक्तूबर में बल्लभगढ़ 10 दिन, चार दिन यमुनानगर, तीन बार भिवाड़ी और गुजरात का नंदेसरी देश के सबसे प्रदूषित शहर रहे। रोक के बाद पटाखा गोदाम पर ताले लटके फरीदाबाद समेत प्रदेश के 14 जिलों में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगने के बाद पटाखा कारोबारियों के गोदाम पर ताले लटके हैं। पटाखे खरीदार पलवल जिले के गांव बघौला के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन गोदामों पर उन्हें कुछ भी नहीं मिल रहा है। यहां से उन्हें मायूस होकर वापस लौटना पड़ रहा है। आरपी इंटर प्राइस के राजेश गुप्ता ने बताया कि इस बार आतिशबाजी का कोई कारोबार नहीं हो रहा है, जिससे उन्हें काफी नुकसान हुआ हैपटाखों पर रोक से हवा में सुधार की उम्मीद अगर प्रशासन और पुलिस पटाखों के जलाने पर रोक लगाने में सफल रही तो फिर इस बार दिवाली पर स्मार्ट सिटी की आबोहवा में करीब पच्चीस फीसदी सुधार की उम्मीद है। बीते वर्ष दिवाली पर वायु गुणवत्ता सूचांक 414 रहा था, जो इस बार सुधार से के साथ 300 के आसपास रहने की उम्मीद है। हरियाणा सरकार ने फरीदाबाद समेत एनसीआर के 14 जिलों में पटाखों की बिक्री और इनके जलाने पर पूर्णतया::रोक लगा दी है। प्रशासन और पुलिस भी इन आदेशों की पालना के लिए सख्ती बरतने की तैयारी में हैं। इसके अलावा प्रतिवर्ष प्रदूषण के कारण स्मार्ट सिटी की दमघोंटू आबोहवा में रहने को मजबूर अधिकांश लोगों में भी पटाखों के प्रति जागरूकता आई है। लोग स्वत: ही पटाखे नहीं खरीद रहे हैं।

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