सरपंच कर रहे हैं किसानों को पराली प्रबंधन के लिए जागरूक

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11 अक्टूबर-हथीन/माथुर | पराली प्रबंधन की दिशा में सरकार की ओर से भले ही प्रयास करने का दावा किया जाता है। लेकिन पलवल जिले की बात करें तो जिले में सरकारी पराली केंद्र तक नहीं है। जबकि गत वर्ष हर जिले में सरकारी पराली केंद्र खोलने की घोषणा की गई थी। जिले में प्राइवेट खरीदार ही ज्यादातर पराली खरीद करते हैं। वही कृषि विभाग का कहना है कि यह प्रोजेक्ट अभी पाइप लाइन में है। पलवल जिले के गांवों में मेवात के प्राइवेट खरीदार सीधे किसानों से संपर्क कर ओने पौने दामों में पराली खरीदकर ले जाते हैं। हालांकि इससे किसानों को थोड़ा बहुत मुनाफा तो होता ही है, पराली जलाने से भी बचाव होता है। जो वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए जरूरी है। जिले में धान की कटाई होकर मंडी में बिक्री के लिए आ रही है। ऐसे में पराली का उचित प्रबंधन करने का यही सही समय है। विभाग का कहना है कि पराली के प्रबंधन के लिए अनेक कृषि यंत्र उपलब्ध है, जिन पर सब्सिडी भी दी जाती है।

मौहमद बिलाल, महासचिव हरियाणा कांग्रेस ने कहा कि, पिछले वर्ष सरकार ने हर जिले में सरकारी पराली केंद्र खोलने की घोषणा की थी। लेकिन सरकार की सभी घोषणाएं हवा हवाई हैं। यह सरकार किसान विरोधी है, सरकार को किसानों के दुख दर्द से कोई मतलब नहीं है। आज किसान विरोधी अध्यादेशों की वजह से देश व प्रदेश का किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर है।

सरफुद्धीन खान मेवाती, राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय शहीदाने मेवात सभा ने कहा कि, किसानों को पराली न जलाने तथा इसके उचित प्रबंधन के लिए जागरूक किया जाता है। सरकार भी इसके लिए तमाम प्रयास कर रही है। किसान सभी का अन्नदाता है, भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए पराली को न जलाकर उसे खाद के रूप में प्रयोग करने के लिए न केवल जागरूक किया जाता है, बल्कि समय-समय पर किसानों की हर संभव सहायता की जाती है।

गीता सौरोत, सरपंच जनाचौली ने कहा कि, किसानों को पराली के उचित प्रबंधन के साथ ही गांव के विकास व स्वच्छता की ओर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि हमारे क्षेत्र में धान की अपेक्षा कपास की अधिक पैदावार होती है, इसलिए पराली इतनी ज्यादा नहीं होती। हमारा गांव एक आदर्श गांव के रूप में स्थापित है, गांव के विकास के साथ ही किसानों को सरकार की हर नई नीति के बारे में अवगत कराया जाता है।

महावीर सिंह, कृषि उपनिदेशक ने कहा कि, जिले में फिलहाल सरकारी खरीद केंद्र नहीं है, प्राइवेट मेवात के केंद्रों द्वारा ही किसानों से सीधा संपर्क कर पराली की खरीद की जाती है। सरकारी खरीद केंद्र का प्रोजेक्ट अभी पाइप लाइन में है। सरकार का प्रयास जारी है, खरीद केंद्र शुरू होने में अभी समय लगेगा। पराली प्रबंधन व अन्य कृषि संबंधी यंत्रों के लिए अनुदान दिया जाता है। किसानों से अपील है कि भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने तथा पर्यावरण सुरक्षित रखने के लिए पराली को न जलाएं।

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