महाकाव्यों के रचयिता के रूप में आचार्य देवेन्द्र को गोल्डेन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में मिला स्थान

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20 अप्रैल- फरीदाबाद। राजनीति में उड़ने वाले ये जितनी भी पत्ते हैं। सब समाज के सुथरे तन पर उभरे हुए चकत्ते हैं। इनकी अलबेली फितरत से परिचित है, इस कवि का मन, मना लिया तो मनकामेश्वर, छेड़ दिया तो छत्ते हैं।

यह सिर्फ कविता की पंक्तियां ही नहीं बल्कि वर्तमान परिवेश की एक सच्ची झलक है जिसे आप देख एवं अनुभव कर सकते हैं। यह एक ऐसे कवि आचार्य देवेंद्र देव की अंतर वेदना भी है जो 35 वर्ष से कविता की साधना, राष्ट्रभाषा के प्रचार-प्रसार व संस्कृति के उत्थान को राष्ट्र गौरव की कविताएं लिखकर अपने देश का नाम भारत  की सीमाओं से पार पहुंचाने का गौरव प्राप्त कर चुके हैं। मध्यक्षेत्र के सुप्रसिद्ध कवि राम भरोसे पांडे पंकज जी एवं राजेंद्र भानु के संपर्क में आने पर देवेंद्र जी को संरक्षण के साथ ही साथ काव्य साधना की प्रेरणा मिली। अखंड ज्योति, युग निर्माण योजना व बरेली, लखनऊ, दिल्ली तथा पूरे देश से प्रकाशित हजारों समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में उनकी रचना प्रकाशित हुई और कैसेट में उनके लिखे गीत संगीत के साथ संग्रहित किए गए।

आकाशवाणी के रामपुर, लखनऊ, दिल्ली आगरा, मथुरा,  इलाहाबाद आदि केंद्रों से उनकी कविताएं प्रसारित हुई। देशगान  के कैसेट अमेरिका तक पहुंचे जिस पर अमेरिका की एक संस्था ने आचार्य श्री देव को विश्व के 300 पदों में से एक शीर्षक गीत श्री देव का ही स्वीकार किया गया। पानीपत साहित्य अकादमी हरियाणा ने वर्ष 1998 में आचार्य  की मानद उपाधि से अलंकृत किया। आचार्य जी साहित्य क्षेत्र में विचारधारा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उद्घोष रूप में जाने जाते हैं इसके अतिरिक्त अखिल भारतीय स्तर पर आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, डॉक्टर विद्यानिवास मिश्र, महादेवी वर्मा , श्याम नारायण पाण्डेय जैसी साहित्यिक विभूतियों की अध्यक्षता में काव्यपाठ करने का गौरव प्राप्त है।

संस्कार भारती हरियाणा के प्रांतीय कोषाध्यक्ष एवं माल्यार्थ फाउंडेशन के फाउंडर प्रेसिडेंट उदितेन्दु वर्मा निश्चल ने बताया की संस्कार भारती के अखिल भारतीय सह साहित्य संयोजक आचार्य देवेन्द्र देव को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में हिंदी विश्व को सर्वाधिक पंद्रह महाकाव्य देने वाले रचयिता के रूप में स्थान मिला जिससे पूरा परिवार, संगठन , साहित्यिक मनीषी और शुभचिंतक आदि गौरवान्वित हैं।

आचार्य देवेन्द्र देव द्वारा अब तक रचित महाकाव्यों  की श्रंखला में सर्वप्रथम वर्ष 1971 के भारत पाक युद्ध में भारतीय शौर्य पर आधारित ‘बांग्ला त्राण’ महाकाव्य, गायत्री परिवार के संस्थापक श्री राम शर्मा आचार्य के जीवन पर आधारित ‘गायत्रेय ‘महाकाव्य, युगनायक स्वामी विवेकानंद के जीवन पर आधारित ‘युवमन्यु’ महाकव्य, योद्धा  बाबा जशवंत सिंह रावत के बलिदान पर आधारित ‘राष्ट्रपुत्र – यशवंत’ महाकाव्य, उपनिषदीय चरित्र नचिकेता के जीवन पर आधारित ‘हठयोगी नचिकेता’ महाकाव्य, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के आदि सरसंघचालक  डॉ हेडगेवार के जीवन पर आधारित ‘बलिपथ’ महाकाव्य, द्वितीय सरसंघचालक माधव राव गोलवलकर  के जीवन पर आधारित ‘इदं राष्ट्राय’ महाकाव्य, परमवीर चक्र विजेता कैप्टन  बाना सिंह के शौर्य पर आधारित ‘कैप्टन बाना सिंह’ महाकाव्य, पुरोधा पंडित बिस्मिल के क्रांतिक जीवन पर आधारित ‘ पंडित राम प्रसाद बिस्मिल’ महाकाव्य, मिसाईल मैन डॉ अब्दुल कलाम के जीवन पर आधारित ‘अग्नि-ऋचा’ महाकाव्य,

महाकाव्यकार पंडित श्री कृष्ण सरल के सृजनधर्मी जीवन पर आधारित ‘शंख महाकाल का’ महाकाव्य, सम्पूर्ण क्रांति के पुरोधा बाबू जय प्रकाश नारायण के जीवन पर आधारित ‘लोकनायक’ महाकाव्य , झारखण्ड के आदिवासी क्रांतिवीर बिरसा मुंडा के बलिदानी शौर्य पर आधारित ‘बिरसा मुंडा’ महाकाव्य, नैमिष व्यास पीठाधीश्वर स्वामी नारदानंद सरस्वती के जीवन पर आधारित ‘ब्रह्मात्मज ‘महाकव्य और लौहपुरुष सरदार बल्लभभाई पटेल के पराक्रमी जीवन पर आधारित ‘लौहपुरुष’ महाकाव्य को लिखने का सौभाग्य माता शारदा की कृपा से प्राप्त हुआ है।

 आचार्य देवेन्द्र देव ने ग्यारवें विश्व हिंदी समेलन मारिसस के कवि सम्मेलन में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के अंतर्गत सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद् द्वारा राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में प्रतिभाग किया। आचार्य देव को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी सहित लगभग 4 दर्जन से अधिक संस्थानों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है|

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