मानव रचना के छात्रों ने बेंगलुरु और दिल्ली यूनिवर्सिटी में जीते अवॉर्ड

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न्यूज़ एनसीआर 26 अक्टूबर फरीदाबाद | मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज के छात्रों ने बेंगलुरु में हुए असेंचर इनोवेशन चैलेंज 2018 और दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस में हुए मेकाथॉन 2018 अपने नाम किया। बीटेक इल्केट्रॉनिक्स और सीएसई के छात्रों ने बेंगलुरु में इनोवेशन फॉर बिजनेस केटेगरी में ज्यूरी च्वाइस अवॉर्ड जीता।

बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स के इश्लोक और सीएसई से दिपेश नरवत, आकाश भड़ाना और डीटीयू के छात्र हिमांशु अग्रवाल ने VET यानी वर्चुअल एक्सपोजर थेरेपी प्रोजेक्ट बनाया था। यह प्रोजेक्ट अलग-अलग तरह के फोबिया और डिप्रेशन से लड़ने में कारगर है। छात्र इश्लोक खुद कुछ समय पहले हाइड्रो फोबिया से पीड़ित था, इससे बाहर निकलने के लिए उसने वीईटी की खोज की और अवॉर्ड भी जीता।

इसके अलावा, दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस में हुए मेकाथॉन-2018 में छात्रों ने टिकट टू ग्रांड फिनाले अपने नाम किया है। मेकाथॉन में उत्तर भारत से 21 टीमों ने हिस्सा लिया था, जिसमें मानव रचना की चार टीमें शामिल थी। छात्रों को प्रोजेक्ट कायली (CAELI) जो कि एक तरह का पोल्यूशन मास्क है यह प्रदूषण को फिल्टर करता है औऱ दूसरा प्रोजेक्ट पल्स (PULSE) जो कि दिल की बीमारियों के बारे में अर्ली स्टेज में ही जानकारी देता है ने फिनाले में अपनी जगह बनाई है।

पल्स को बेंगलुरु के जेयू इन्क्यूबेटर की ओर से बेस्ट सोशल इनोवेशन अवॉर्ड से भी नवाजा गया। इलेक्ट्रॉनिक्स के देवदत्त, सीएसई के वासू कौशिक और शुभी सक्सेना ने कायली और सीएसई के भरत, आकाश भड़ाना, इश्लोक वशिष्ठ और दिपेश ने पल्स इनोवेट किया था। आईईएसई मेकाथॉन भारत में सेमी कंडक्टर्स और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम उद्योग के लिए प्रौद्योगिकी नवाचार चलाने में सक्षम बनाने के लिए आईईएसए पहल है।

एमआरआईआईआरसी के डिप्टी डायरेक्टर उमेश दत्ता ने बताया कि, मानव रचना के छात्र हमेशा से ही इस तरह के अवॉर्ड्स जीतते आए हैं, छात्र दिन-रात की मेहनत और गहन रिसर्च के बाद प्रोजेक्ट्स तैयार करते हैं। हम उम्मीद करते हैं आने वाले समय में भी हमारे छात्र इस तरह के अवॉर्ड्स अपने नाम करते रहेंगे।

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