‘सर्वे भवन्तु सुखिनः ट्रस्ट’ वीमेन हाइजीन को लेकर गांव-गांव जाकर महिलाओं को कर रही जागरूक

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न्यूज़ एनसीआर, 04 अप्रैल-फरीदाबाद | यूं तो महिलाओं के वो दिन अपने आप में ही परेशानी भरे होते हैं, और जो थोड़ी कसर रह जाती है, उसे कुछ दकियानुसी नियम पूरा कर देते हैं। नतीजा ये, कि माहवारी का समय महिलाओं को एक श्राप जैसा लगता है। हिंदू धर्म ही नहीं लगभग हर धर्म में इन दिनों महिलाओं को अपवित्र माना जाता है और उनके साथ अछूतों जैसा व्यवहार किया जाता है, जैसे ये माहवारी उनकी किसी गलती की वजह से हो रही हो। उक्त शब्द सर्वे भवन्तु सुखिनः ट्रस्ट की संस्थापक सुषमा यादव ने मेवला महाराजपुर मे महिला सशक्तिकरण व् महिलाओं से सम्बन्धित शारीरिक समस्याओं के लिए पार्षद हेमा बैसला के सहयोग से आयोजित सेमिनार में मौके पर उपस्थित महिलाओं से रूबरू होते हुए कहे।

सुषमा यादव ने कहा कि पहले तो समाज में माहवारी के उन दिनों को बीमारी समझने पर रोक लगनी चाहिए। समाज, शब्दों में तो इसे बीमारी नहीं कहता लेकिन जिस तरह से उन दिनों में लड़कियों के साथ व्यवहार होता है वैसा केवल बीमारी के दिनों में मरीजों से ही किया जाता है।वो भी किसी छुआ-छूत वाली ही बीमारी में। आचार नहीं छूना, मंदिर नहीं जाना, ये नहीं करना, वो नहीं करना आदि कई हिदयातें हैं जो भ्रांतियों के रुप में हम सब के बीच फैली हुई हैं।जरूरी है इन भ्रांतियों से जुड़े सच को जानकर इन्हें खत्म किया जाए।

सर्वे भवन्तु सुखिनः ट्रस्ट की प्रमुख सदस्य अंजू यादव ने बताया कि लगभग 20 से 30 प्रतिशत महिलाये हार्मोंनल उतार-चढ़ाव के कारण ओवुलेशन और रक्तस्राव के दौरान बहुत अधिक संवेनदनशील हो जाती है।

अंजू यादव ने बताया कि मासिक धर्म के दौरान अक्सर महिलाओं को गंभीर रूप से सिरदर्द की समस्या होती है। इस प्रक्रिया के दौरान तीन से से आठ दिनों के दौरान करीब 35 मिलीलीटर खून बहता है। लेकिन बहुत ज्यादा रक्त स्राव की स्थिति में स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

मौके पर मौजूद पार्षद हेमा बैसला ने महिलाओं को समझाते हुए कहा कि पीरियड्स के दौरान लड़कियों को व्यायाम ना करने की हिदायत दी जाती है। दर्द के दौरान तो लड़कियां बिल्कुल भी काम नहीं करती। लेकिन ये बिल्कुल गलत है। आराम करने से दर्द दूर नहीं होता बल्कि उन दिनों में और भी ज्यादा सक्रिय रहने से किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होती। व्यायाम तो उस दौरान जरूर करना चाहिए। व्यायाम रक्त और ऑक्सीजन के प्रवाह को सुचारु कर पेट में दर्द और ऐंठन को दूर करे में सहायक होता है।

हेमा बैसला ने कहा कि, पीरियड्स सामान्यतः 28 से 32 दिनों में एक बार होता है। हालांकि अधिकतर पीरियड्स का समय तीन से पांच दिन रहता है परन्तु दो से सात दिन तक की अवधि को सामान्य माना जाता है।

मालूम हो, स्वस्थ महिला के शरीर में एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन जैसे तीन हार्मोन्स मौजूद होते हैं। लेकिन कभी-कभी इन हार्मोन्स में पीरियड्स में गड़बड़ हो जाती है जिसके कारण मासिक धर्म में कई प्रकार की समस्याक देखने को मिलती है। पुरूषों की तुलना में महिलाओं को एंग्जाइटी डिसऑर्डर की समस्या ज्यादा होती है। ये अंतर अलग अलग विकासशील और विकसित देशों और समय के हिसाब से बदल भी सकता है।आप भले ही किसी भी देश और सभ्यता से संबंध रखते हो पर शोध के मुताबिक बुजुर्गों की तुलना में 35 साल से कम वर्यु के लोगों मे एंग्जाइटी डिसऑर्डर ज्यादा देखा जाता है।

बतादें कि सर्वे भवन्तु सुखिनः ट्रस्ट वीमेन हाइजीन को लेकर काफी गंभीर है जिसके लिए ट्रस्ट की कार्यकर्त्ता महिलाये सुषमा यादव व अंजू यादव के नेतृत्व में गांव-गांव जाकर महिलाओं को जागरूक कर रही हैं इसके अलावा ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ‘, ‘सेल्फी विद डॉटर’ अभियान के प्रति भी महिलाओं को बताया जा रहा है।

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