कैसे ब्रह्मजीत दूधिये से बना खलनायक, पढ़ें पूरी खबर

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न्यूज़ एनसीआर, 25 मार्च-फरीदाबाद | फरीदाबाद जिले में कभी खौफ से लोग डरते थे आज उसी ब्रह्मजीत का शव दस फुट गहरे गड्ढे से बरामद हुआ है। बताया जाता है कि, ब्रह्मजीत कभी सीधा-साधा दूधिया हुआ करता था। लेकिन स्टैंड माफिया बनने के चक्कर में वह दूधिये से बदमाश बन बैठा। वह वर्ष 1991 में कालका क्षेत्र से चुने गए बाहुबली विधायक पुरुषभान भड़ाना का करीबी था। भजनलाल सरकार में पुरुषभान भड़ाना न केवल कद्दावर नेता थे, बल्कि उनकी सरकार में तूती बोलती थी। पुरुषभान के कारिंदों में ब्रह्मजीत के बाद सरदार अमरजीत का नाम जुड़ा।

धीरे-धीरे अमरजीत ने ब्रह्मजीत को पीछे छोड़ भजनलाल दरबार में सीधी पैठ बना ली थी। कुछ समय में अमरजीत ने सरकार का तख्ता पलटने वाले शख्स जैसी ख्याति हासिल कर ली। विधायक काल में ही पुरुषभान की हृदयघात से मौत हो गई। अमरजीत का कद बढ़ता जा रहा था। इस बीच ब्रह्मजीत के हाथों से पारिवारिक रंजिश में अपने ही गांव के चार लोगों की हत्या हो गई। चौहरे हत्याकांड के बाद ब्रह्मजीत का नाम पीडि़त परिवार के पांच और लोगों की हत्या से जुड़ गया।

वर्ष 2003 में तत्कालीन एसएसपी रणबीर शर्मा ने चौहरे हत्याकांड में ब्रह्मजीत समेत कईयों को अरेस्ट किया था, जिसमें पांच को फांसी और दस लोगों को उम्रकैद हुई थी। अपने घर के सामने पार्क में टहलते वक्त सरदार अमरजीत को एके-47 से छलनी करके मौत के घाट उतार दिया गया था। अमरजीत की हत्या उसके खास गुर्गे बबलू बहबलपुरिया ने लेनदेन के विवाद में की थी। बबलू को यह भी शक था कि अमरजीत उसकी हत्या करवा सकता है। बबलू ने खुद की मौत के डर से अमरजीत को ही मार डाला था। हालांकि कुछ दिन बाद ही राजस्थान पुलिस ने बबलू को भी मुठभेड़ में मार गिराया था। कुछ लोग अमरजीत की हत्या और बबलू का एनकाउंटर राजनैतिक षडयंत्र का हिस्सा बताते हैं।

रिसाल परिवार पर हत्या की साजिश रचने का आरोप


हत्या की घटना के बाद जब ब्रह्मजीत के भाई ब्रह्मपाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि राजीव भाटी गांव में उसी मुहल्ले में ब्याहा है, जहां उनका दुश्मन परिवार रहता है। ब्रह्मपाल का आरोप है कि रिसाल परिवार के सदस्यों ने राजीव के साथ मिलकर उसके भाई की हत्या करवाई है।

शांत स्वभाव का था हत्यारोपी राजीव


ब्रह्मजीत को क्या पता था कि अपने गांव में ब्याहा राजीव भाटी ही उसकी हत्या कर देगा। ब्रह्मजीत राजीव पर भरोसा करता था। वैसे भी राजीव शांत स्वभाव और डरपोक किस्म का आदमी है। 27 फरवरी की सुबह जब राजीव और श्वेता कार लेकर मिलन वाटिका पहुंचे, तब भी ब्रह्मजीत ने यह नहीं सोचा था कि कुछ देर बाद ही उसकी मौत होने वाली है।

धोके से रची सामूहिक हत्या की साजिश


धोखे से मारे गए थे हरपाल, समयपाल व राजू और दिनेश। पुलिस का रिकॉर्ड बताता है कि 1999 में बुढ़ैना के हरपाल, समयपाल व राजू एवं दिनेश की जब सामूहिक रूप से हत्या की गई थी, तो इन चारों को पारिवारिक रंजिश में समझौते के लिए ब्रह्मजीत ने अपनी कोठी पर बुलाया था। कोठी के बाहर से ही ब्रह्मजीत वगैरह उपरोक्त चारों का अपनी कार में किडनैप करके अरावली की पहाड़़ी में ले गए। चारों को पहले गोली मारी, फिर इनकी लाश टायरों के बीच डालकर जला दी गई थी।

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