विमानों में वाईफाई के प्रयोग के लिए भारत में डाटा स्टोर करने की शर्त

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नई दिल्ली | विमानों में उड़ान के दौरान वाईफाई की सुविधा की अनुमति देने के लिए गृह मंत्रालय ने डाटा स्टोरेज के लिए सर्वर या उसकी नकल देश में होने की शर्त रखी है। विमानों में वाईफाई पर नागर विमानन मंत्रालय लंबे समय से विचार कर रहा है। विमान सेवा कंपनियाँ भी इसके पक्ष में हैं। इस संबंध में सचिव स्तरीय समिति की एक बैठक भी हो चुकी है। लेकिनगृह मंत्रालय सुरक्षा कारणों से चाहता है कि विमानों में इस्तेमाल होने वाले वाईफाई का मूल सर्वर या कम से कम सर्वर की नकल भारत में स्थापित की जाये ताकि जरूरत पड़ने पर सुरक्षा एजेंसियों को उसके डाटा आसानी से उपलब्ध हो सके। नागर विमानन मंत्रालय की एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस तरह की सेवा प्रदाता अधिकतर कंपनियाँ यूरोपीय या अमेरिकी हैं जिनके सर्वर भी यूरोप या अमेरिका में हैं। सुरक्षा एजेंसियों को यदि कभी किसी प्रकार की जाँच के लिए उन डाटा की आवश्यकता हुई तो विदेश में सर्वर होने से उस तक पहुँच आसान नहीं होगी। देश में डाटा स्टोर होने से भारतीय दूरसंचार नियमों के तहत उसकी उपलब्धता आसान हो जायेगी। इसलिए गृह मंत्रालय इस बात पर जोर दे रहा है। गृह मंत्रालय की हरी झंडी के अलावा इस सुविधा के लिए दूरसंचार अधिनियम में भी बदलाव की आवश्यकता होगी। अधिकारी ने कहा कि इस मामले में सारी कार्रवाई दूरसंचार मंत्रालय द्वारा की जा रही है तथा गृह मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय प्रमुख हितधारक हैं। नागर विमानन मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह विमानों में वाईफाई के पक्ष में है। हालाँकिउसने यह भी कहा कि दूरसंचार विभाग वाईफाई के इस्तेमाल पर कुछ सीमाएँ भी रख सकता है। इस संबंध में करीब एक महीने पहले संबद्ध मंत्रालयों के सचिवों की समिति की बैठक हो चुकी है। अधिकारी ने बताया कि जल्द ही समिति की दूसरी बैठक होगी जिसके लिए फीडबैक भी आ चुके हैं। वर्तमान में कई अंतर्राष्ट्रीय एयरलाइंस विमानों में वाईफाई सेवाएँ दे रही हैं। लेकिनभारत में इसकी अनुमति नहीं होने के कारण देश की हवाई सीमा में प्रवेश करते ही उन्हें यह सुविधा बंद करनी पड़ती है।

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