आशा वर्करों ने अपनी मांगों को लेकर शुरू की हड़ताल

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07 अगस्त-फरीदाबाद | आशा वर्करों को हेल्थ वर्कर का दर्जा देने, आशाओं को सरकार के पैनल के अस्पतालों में इलाज की सुविधा प्रदान करने एवं कोविड 19 में कार्यरत आशाओं को जोखिम भत्ते के तौर पर चार हजार रूपए दिए जाने आशाओं को पक्का करने जब तक नियमित नहीं बनाया जाता है तब तक हरियाणा सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन देने और वेतन को महंगाई के साथ जोड़ने की मांगो को लेकर आज शुक्रवार से आशा वर्करों ने दो दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी। यह हड़ताल कल भी जारी रहेगी।आज की हड़ताल में फरीदाबाद के सभी आशा वर्करों ने भाग लिया। हड़ताल के समर्थन में बादशाह खान अस्पताल के सम्मुख आशा वर्करों की विरोध सभा आयोजित की गई। इस सभा की अध्यक्षता जिला प्रधान हेम लता ने की जब की संचालन जिला सचिव सुधा पाल ने किया।

इस अवसर पर सीटू के जिला प्रधान निरंतर पराशर, जिला उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह डंगवाल एवम् जिला उप प्रधान विजय झा विशेष रूप से उपस्थित रहे। हड़ताली कर्मचारियों को संबोधित करते हुए जिला उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने कहा कि सरकार आशा वर्करों के साथ घोर अन्याय कर रही है। इनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। कोरोना महामारी जैसी घातक बीमारी मैं भी सरकार इनके साथ भेदभाव कर रही है सरकार की तरफ से कोरोना संक्रमित होने पर आशा वर्करों को इलाज की सुविधा तक नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आशा वर्करों की आठ एक्टिविटी की काटी गई 50% राशि अभी तक नहीं दी गई है कोविड-19 के लिए दिए जा रहे ₹1000 की प्रोत्साहन राशि का 50% का भुगतान भी नहीं हुआ है। गंभीर रूप से बीमार एवं दुर्घटना की शिकार हुई आशाओं का पैनल के अस्पतालों में इलाज तक नहीं किया जाता है। उन्होंने सरकार से आशा वर्करों के साथ 21 जुलाई 20 18 में हुए नोटिफिकेशन को हूबहू लागू करने की मांग की। डंगवाल ने कहा कि केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आवाहन पर 9 अगस्त को जेल भरो आंदोलन में भी आशा वर्कर बड़ी संख्या में भाग लेंगी।

उन्होंने कहा कि भारत बचाओ और जेल भरो आंदोलन में सीटू से संबंधित किसान सभा फरीदाबाद , आंगनवाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर यूनियन, मिड डे मील वर्कर्स यूनियन, आंगनवाड़ी मदर ग्रुप समिति, के अलावा विभिन्न फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर भी बड़ी संख्या में जेल भरो आंदोलन में भाग लेंगे। इसकी तैयारी बड़े पैमाने पर की जा रही है। आज मिड डे मील वर्कर की गोची और बड़खल में बैठक हुई। की तरह वाईएमसीए के कर्मचारियों की बैठक हुड्डा ओपन थिएटर में हुई इसको सीटू के जिला सचिव लालबाबू शर्मा और मिड डे मील वर्कर की प्रधान कमलेश चौधरी ने संबोधित किया सीटू के जिला उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने बताया कि

कोरोना संक्रमण के कारण अचानक घोषित लोक डाऊन से करोड़ों लोगों के रोजगार छीन लिए गए हैं। गरीबों के सामने खाद्य पदार्थों का संकट खड़ा हो गया है। उत्पादन, कारोबार, रोजगार अभी पटरी पर आने में बड़ा समय लगने की संभावना है। ऐसे समय में  जनता को संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्य के ढ़ांचें को मजबूती प्रदान करना एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किए जाने की बेहद जरूरत है। दूसरी तरफ करोड़ों लोगों को भुख व कुपोषण से बचाने के लिए न केवल मुफत राशन मुहैया करवाए जाने की जरूरत है बल्कि उसे नगदी भी प्रदान की जानी चाहिए। जहां एक तरफ मजदूरों के रोजगार बहाली की जरूरत है वहीं खेती व किसानी को संकट से उभारने के लिए मदद की तुरंत दरकार है।

परन्तु बार-बार इस बारे अपील करने,एवम् मांग पत्र भेजने व सीमीत प्रतिरोध के द्वारा सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखने के बावजूद इस तरफ केन्द्र सरकार ने बेहद संवेदनहीन ता दिखाई है । जनता को राहत देने की बजाय सरकार ने लोक डाऊन से पहले जारी प्रयासोें के तहत सार्वजनिक  व सरकारी क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपने का काम किया है। मजदूरों के अभी तक हासिल किए गए अधिकारों को छीनने का क्रम जारी रखा है। खेती कें बारे तीन अध्यादेश लाकर सरकार ने खेती व फसलों को कारपोरेट व अमीरों के हवाले करने के व किसानों को उनके रहमों करम पर छोड़ देने के ही कदम उठाए हैं। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्य के ढ़ाचें को मजबूत करने की बजाय सरकार का रूख जनता के बुनियादी नागरिक अधिकारों को छीनने का ही रहा है। हमारे देश की आत्मनिर्भरता व उसके बुनियाद को खत्म करने का काम इस कोरोना काल में केन्द्र सरकार कर रही है।

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