कामिनी बर्मन का फर्नीचर बन रहा है सूरजकुंड मेले में आए दर्शकों की पसंद

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12 फरवरी- फरीदाबाद। 34वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में इस बार फिर से आसाम से आए कामिनी बर्मन का फर्नीचर लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। यही वजह है कि उसे इस बार मेले से बड़ी मात्रा में एडवांस आर्डर भी मिले हैं। आसाम के मालबारी जिला के रहने वाले कामिनी का कहना है कि उसने अपने पुस्तैनी कारोबार को 1979 में एक छोटे उद्योग का रूप दिया और गांव में ही एक लघु उद्योग स्थापित किया। यहां उसने कैन की लकड़ी से फर्नीचर बनाने से काम की शुरूआत की। पहली बार 1979 में ही दिल्ली के प्रगति मैदान में अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में अपना सामान बेचने का मौका भी मिल गया। लोगों ने उसके फर्नीचर को काफी पसंद किया।

उसके फर्नीचर की खासियत यह है कि वह बरसात व धूप में पड़ा रहने के बावजूद 40 वर्षों तक भी खराब नहीं होता। धूप व बारिश कैन की लकड़ी को मजबूती देती रहती है। उन्होंने बताया कि लोग घरों में लान व ड्राईंग रूम के लिए उनके फर्नीचर को खरीदते हैं। उन्होंने बताया कि प्रगति मैदान के बाद उसने ओखला दिल्ली में लगने वाले दिल्ली हाट, जनकपुरी सहित सभी स्थानों पर अपना फर्नीचर बेचा। मुंबई, केरला, नेपाल, भूटान सहित कई देशों में भी वह अपना फर्नीचर बेच चुके हैं।
मेले के स्टाल नंबर 386 पर अपना सामान बेचने वाले कामिनी बर्नर का कहना है कि कैन की लकड़ी से बने सोफे, टेबल, कुर्सी सहित वह अब टेबल लैंप, महिलाओं के कड़े, बांस के फ्रेम में जड़े हुए शीशे, घडि़य़ों सहित कई आईटम अब तैयार करते हैं। इस बार के सूरजकुंड मेले में उसे जबरदस्त रिसपांस मिला और पूरा सामान बिकने के साथ ही बड़ी संखया में एडवांस आर्डर भी मिले हैं।

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