33 मेलों के साक्षी मदनलाल ने बताया सूरजकुंड मेले का इतिहास

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03 फरवरी- फरीदाबाद। 34वें सूरजकुड मेलेे में कुछ ऐसे शख्स भी मौजूद हैं जो अभी तक आयोजित सभी सूरजकुंड मेलों के साक्षी रहे हैं। उन्हीं में से एक है भक्तां नागौर राजस्थान से यहां स्टॉल लगाने आए मदनलाल व उनके परिजन जिन्होंने इस मेले के बाल्यकाल से लेकर युवावस्था तक का दौर देखा है। मुख्य चौपाल के पास मदनलाल की स्टॉल जहां वे व उनकी धर्मपत्नी गुलाब देवी महिलाओं को हाथ से निर्मित घरेलू सजावट का छोटा-छोटा सामान दिखाने के साथ उनकी खूबी बताते हुए आपको दिखाई देंगे। उनके छोटे से स्टॉल पर हाथ की चक्की सहित जन्म से लेकर शादी तक और किसी भी मांगलिक पर्व का आवश्यक सामान उपलब्ध है।

मदनलाल ने बताया कि सूरजकुंड के सबसे पहले मेले में उनकी मां स्वर्गीय भंवरी देवी यहां आई थी। शानदार हुनर की स्वामिनी भंवरी देवी को मेले प्रशासन की तरफ कला  पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। एक अन्य मेले के दौरान तत्कालीन राज्यपाल महाबीर प्रसाद ने भी उन्हें नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया था। उन्होंने बताया कि उनके हस्तशिल्प देखने के लिए देश-विदेश की प्रमुख हस्तियां उनकी स्टॉल का दौरा कर चुकी हैं। जिनमें सोनिया गांधी, मशहूर अदाकारा शबाना व शहनाज हुसैन शामिल हैं।

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