प्रेस कॉलोनी के निवासियों ने मुख्यमंत्री को भेजी मंदिर के बारे में शिकायत रिपोर्ट

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21 जनवरी-फरीदाबाद। प्रेस कॉलोनी में शिव मंदिर परिसर के चारों तरफ अवैध कब्जे के विवाद पर शिकायतकर्ता मोहनलाल कुकरेजा ने प्रेस स्टेटमेंट जारी किया है और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के पास शिकायत भेजी है। मोहनलाल कुकरेजा ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि प्रेस कॉलोनी में सरकारी जमीन पर बने मंदिर को तोड़ने के बजाय सरकार इसे अपने कब्जे में ले ले और एक ट्रस्ट बनाकर इसकी देख रेख करे। इसके अलावा मंदिर के चारों तरफ बनायी गयी अवैध दीवार और तारों की बाड़ को हटाकर जनता के लिए रास्ते खोला जाय।

मोहनलाल ने अपनी चिट्ठी में लिखा है- मेरी 129/3, जवाहर कॉलोनी में अनिल मशीन टूल्स के नाम से वर्कशॉप थी जो अब बंद है, पास में ही शिव मंदिर है जो कि प्रेस कॉलोनी/जवाहर कॉलोनी में बना है जिसके चारों तरफ तार/दीवार लगाकर अवैध कब्ज़ा किया गया है जिसकी वजह से जनता को दर्शन करने में परेशानी होती है। मोहनलाल कुकरेजा ने बताया कि – यह कब्जा मंदिर के कुछ स्वार्थी तथाकथित पदाधिकारियों ने अपने फायदे के लिए कर रखा है ताकि वहां पर व्यावसायिक/राजनैतिक/शादी समारोह/पार्टी का आयोजन कराने के नाम पर पैसे की कमाई की जा सके। इन स्वार्थी लोगों की वजह से आसपास की जनता को परेशानी होती है, आसपास के लोगों को वहां पर वाहन खड़ा करने से मना किया जाता है. गलियां संकरी होने की वजह से पहले स्थानीय लोगों के रिश्तेदार कुछ समय के मंदिर के बाहर गाड़ियां खड़ी करते हैं लेकिन अब ऐसा करने पर मंदिर के लोग धमकाते हैं और अपशब्द बोलते हैं एवं अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं।

मोहनलाल कुकरेजा ने बताया – मैंने जनता की परेशानी को ध्यान में रखते हुए कब्जे को हटाने की अपील की ताकि जनता को मंदिर में दर्शन करने की आजादी मिल सके लेकिन मंदिर के स्वार्थी पदाधिकारियों ने मेरे बारे में झूठी अफवाह फैला दी कि मैं मंदिर तुड़वाना चाहता हूँ। श्रीमान जी, मैं भी हिन्दू धर्म में आस्था रखता हूँ और मंदिर का विस्तार होते देखा हूँ, मैं मंदिर तोड़ने के खिलाफ हूँ, मैं सिर्फ चारों तरफ किये गए अवैध कब्जे के खिलाफ हूँ।

मेरे बारे में गलत अफवाह फैलाई जा रही है, मुझे हिन्दू विरोधी साबित करने का प्रयास किया जा रहा है जिसकी वजह से मेरी जान को भी खतरा है, इन लोगों के उकसावे पर जनता कभी भी मुझपर हमला कर सकती है। अगर मेरे साथ कुछ भी अनहोनी होती है तो उसका जिम्मेदार मंदिर के स्वार्थी पदाधिकारी होंगे। हमने और देवराज मदान एवं अमित नरूला जिनकी पास में ही वर्कशॉप है, ने मंदिर के चारों तरफ अवैध कब्जे को हटाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका डाली थी जिसका केस नंबर – 32042 है. अगर हाईकोर्ट के आदेश पर मंदिर पर तोड़ फोड़ की कार्यवाही होती है तो इसके लिए ये स्वार्थी तत्त्व ही जिम्मेदार होंगे। स्वार्थी तत्वों ने हमें हाईकोर्ट जाने के लिए मजबूर किया है। शुरुआत इन्हीं लोगों ने की थी, इन्होने हम तीनों की वर्कशॉप को अवैध बताकर सील करवाने का प्रयास किया और हमारे वर्कशॉप में काम कर रहे 30 – 40 लोगों को बेरोजगार करने का प्रयास किया। इसीलिए हमें मजबूरन सेक्टर-12 कोर्ट की शरण लेनी पड़ी जिसका मामला विचाराधीन है। इन्होने अवैध कब्जा के जरिये मंदिर परिसर का विस्तार करने के मकसद ने हम लोगों की वर्कशॉप बंद करवाने का प्रयास किया था। इस एरिया में हजारों वर्कशॉप चल रही हैं जिनकी वजह से लोगों को रोजगार मिल रहा है. हमारे वर्कशॉप के खिलाफ कार्यवाही होने की वजह से हजारों वर्कशॉप मालिकों में डर का माहौल है. लोगों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।

हम सभी फरियादी चाहते हैं कि मंदिर के चारों तरफ  अवैध कब्जे को हटाकर परिसर को कब्जा मुक्त कराया जाय। हम मंदिर को तोड़ने के खिलाफ हैं, श्रीमानजी यह मंदिर सरकारी जमीन पर बना है इसलिए हम सभी चाहते हैं कि एक ट्रस्ट बनाकर मंदिर की देखरेख को उसी ट्रस्ट के सुपुर्द किया जाय ताकि स्वार्थी तत्वों को सबक सिखाया जा सके वरना लोग सरकारी जमीन पर निजी फायदे के लिए कब्जा करते रहेंगे।

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