हरियाणा के स्कूलों मैं डिजिटल मशीन से होगी छात्रों के खून की जांच

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16 जनवरी- हथीन, (माथुर)। अब पलवल जिला सहित संपूर्ण हरियाणा के 22 जिलों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। आरबीएसके के माध्यम से बनी टीमें अब प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में जाकर डिजिटल मशीन के माध्यम से बच्चों के होमो ग्लोबिन खून की जांच करेगी। जिन बच्चों में खून की कमी पाई जाएगी उन्हें उचित आहार देने समेत अन्य प्रकार की योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। जिसमें वह एनीमिया के शिकार ने हो सके। इनके लिए नई मशीनें उपलब्ध कराई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आर.आर.जोवल ने बताया कि हरियाणा सरकार एनीमिया को दूर करने के लिए स्कूलों में आंगनवाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों की जांच करेगी। इसके लिए डिजिटल हिमोग्लोमिटर मशीन की व्यवस्था की गई है।

उउल्लेखनीय है कि बच्चों में खून की कमी के कारण इनका शारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता है। बड़ी संख्या में एनीमिया के शिकार बच्चों के परिजनों को बच्चों के सही खानपान के बारे में जानकारी नहीं होती। इस कारण उन्हें पोषित आहार नहीं मिल पाता।

ज्ञातव्य है कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के सामने रिपोर्ट में सामने आया है कि 72 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए हरियाणा में अब सरकार ने एक कदम उठाए हैं। डिजिटल मशीन के माध्यम से सरकारी स्कूल और
आंगनवाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों में खून की जांच की जाएगी। मशीन से कुछ ही मिनटों में बच्चों की खून की मात्रा का पता लगाया जा सकेगा। खून की कमी छोटे बच्चों में अधिक पाई गई है, 2 वर्ष तक की आयु तक के 83 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी पाई गई है। जबकि 2 से 5 वर्ष तक आयु वर्ग के 70 प्रतिशत बच्चे खून की कमी से जूझ रहे हैं। इन बच्चों को समय के अनुसार पर्याप्त मात्रा में पोषक आहार नहीं मिल पाता।

नेशनल सर्वे के मुताबिक हरियाणा के केवल 44 प्रतिशत बच्चों को ही आंगनवाडियों द्वारा दी जा रही सुविधा ही मिलती है। इनमें 40 प्रतिशत ग्रोथ मॉनिटरिंग, 39 प्रतिशत बच्चों को सप्लीमेंट, 37 प्रतिशत बच्चों को स्वास्थ्य जांच और 32 प्रतिशत बच्चों को स्कूल जाने से पहले विभिन्न प्रकार की योजनाओं का लाभ मिल पाता है। इसके कारण यह बच्चे एनीमिया के शिकार होने से बच पाते हैं। पलवल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रदीप शर्मा ने बताया जिले के बच्चों में रक्त अल्पता खत्म करने के लिए विभाग गंभीर है। एनीमिया पीडित बच्चों को पूरक पोषाहार मिले इसके लिए कदम उठाए जा रहे हैं। बच्चों के अभिभावकों को भी जागरूक किया जा रहा है।

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