महिलाओं का सफ़र हो सुरक्षित, ब्रेकथ्रू लेकर आया हाइपर लोकल कैंपेन

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09 दिसंबर-फरीदाबाद | सोमवार, महिलाओं के आने-जाने के रास्तों, परिवहन के साधनों को सुरक्षित बनाने के मुद्दे को लेकर महिला अधिकारों पर काम करने वाली संस्था ब्रेकथ्रू हाइपर लोकल कैंपेन लाई है। 10 से 19 दिसंबर तक चलने वाले इस अभियान के माध्यम से फरीदाबाद के मेवला महाराजपुर, डबुआ कालोनी और बसेलवा के 27 स्थानों पर जाकर महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा के मुद्दे पर मैजिक शो के माध्यम से सीधे समुदाय से चर्चा कर उन्हे महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल के निर्माण के लिए जागरुक किया जाएगा।

यह जानकारी ब्रेकथ्रू के स्त्रीलिंक कार्यक्रम की प्रोग्राम लीड मौसमी कुंडू ने शहर के एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में दी। कार्यक्रम में एसीपी धारणा यादव और अमन नेटवर्क से सरिता भी शामिल हुईं। मौसमी ने आगे कहा कि पिछले बीस सालों से ब्रेकथ्रू अपने विभिन्न अभियानों, कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को समाप्त करने के लिए काम कर रहा है। इसी कड़ी में फरीदाबाद में हम स्रीलिंक कार्यक्रम से कपड़ा फैक्ट्री में कार्यरत कामकाजी महिलाओं के जीवन को हिंसा मुक्त बनाकर उन्हें भयमुक्त सुरक्षित वातावरण बनाने पर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अकसर हम देखते है कि महिलाओं को अपने घर,आने-जाने के रास्तों, परिवहन से लेकर कार्यस्थल तक लैंगिक भेदभाव, काम का दोहरे बोझ, शारीरिक, मौखिक, आर्थिक जैसी तरह-तरह की हिंसा का सामना करना पड़ता है। कार्यस्थल पर भी उनके साथ लैंगिक आधार पर भेदभाव होता है उनको पुरूषों के बराबर वेतन भी नहीं मिलता है। घर के काम, बच्चों की देखभाल और नौकरी की जिम्मेदारी का बोझ भी उन्हें अकेले ही उठाना पड़ता है। वहीं उनके कभी घर देर से पहुंचने, ऑफिस के लिए तैयार होने, साथियों के साथ उनके बात-व्यवहार पर भी अकसर सवाल उठाए जाते हैं। इन वजहों से अकसर उनकी नौकरी छूट जाती है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक दशक में भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या 32 से घटकर 25 फीसदी हो गई है,साफ है कि महिलाओं की हिस्सेदारी नौकरियों में घट रही है। हम इसी माहौल को बदलने के लिए काम कर रहे । इस बदलाव के लिए पुरूषों को भी आगे आने की जरूरत है।

एसीपी, क्राइम अंगेस्ड वूमेन, धारणा यादव ने बताया कि पिछले साल जहां महिलाओं के खिलाफ हिंसा के फरीदाबाद में लगभग 350 मामले दर्ज हुए थे, वहीं इस साल अभी तक 700 से अधिक मामले दर्ज हो चुके है। जिससे साफ है कि महिलाएं अपने खिलाफ हो रहीं हिंसा को रोकने के लिए अब कदम उठाने लगी हैं। उनका विश्वास भी महिला थानों और दुर्गा शक्ति जैसे माध्यमों पर बढ़ा है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ सार्वजनिक जगहों पर छेड़छाड़ जैसी घटनाएं आम है लेकिन इसे पुलिस और आम जनता की मदद से ही रोका जा सकता है। यहां पर वो उन लोगों के संदर्भ में बात कर रहीं जो घटना के समय मूक दर्शक की घटना को होते हुए देखते हैं,उसको रोकने के लिए कदम नहीं उठाते हैं।

अमन नेटवर्क की प्रतिनिधि सरिता बलूनी ने कहा कि आने- जाने के रास्तों, साधनों ( परिवहन) को सुरक्षित करने की जरूरत है,क्योंकि इन वजहों से महिलाओं और लड़कियों के बाहर आने-जाने पर जहां रोक लगती है, वहीं कई बार इसका परिणाम उनकी नौकरी, पढ़ाई छूटने के रूप में देखने को मिलता है। उन्होंने बताया कि अमन नेटवर्क महिलाओं के ख़िलाफ होने वाली हिंसा पर काम करता है जिसके अन्तर्गत दो सौ से अधिक स्वंयसेवी संस्थाएं मिलकर महिलाओं के लिए सहयोगी माहौल के लिए काम कर रही हैं। इस अवसर पर एसएचओ. एनआईटी, सीमा भी मौजूद रहीं।

क्या है ब्रेकथ्रू


ब्रेकथ्रू एक स्वयंसेवी संस्था है जो महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ होने वाली हिंसा और भेदभाव को समाप्त करने के लिए काम करती है। कला, मीडिया, लोकप्रिय संस्कृति और सामुदायिक भागेदारी से हम लोगों को एक ऐसी दुनिया बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, जिसमें हर कोई सम्मान, समानता और न्याय के साथ रह सके। हम अपने मल्टीमीडिया अभियानों के माध्यम से महिला अधिकारों से जुडें मुद्दों को मुख्य धारा में ला कर इसे देश भर के समुदाय और व्यक्तियों के लिए प्रासंगिक भी बना रहे हैं। इसके साथ ही हम युवाओं, सरकारी अधिकारियों और सामुदायिक समूहों को प्रशिक्षण भी देते हैं, जिससे एक नई ब्रेकथ्रू जेनरेशन सामने आए जो अपने आस-पास की दुनिया में बदलाव ला सके।

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