राजकीय महाविद्यालय में हिन्दी दिवस का अयोजन हुआ

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न्यूज़ एनसीआर, 14 सितंबर-फरीदाबाद | राजकीय महािद्यालय फरीदाबाद में प्राचार्या डॉ. प्रीता कौशिक के सफल प्रबंधित निर्देशन में बेहद उत्साह, जोश व मातृ भाषा के प्रति भावनात्मक जुड़ाव के माहौल में हिंदी दिवस समारोह के आयोजन किया गया।हिंदी दिवस के अवसर पर महाविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष डा. प्रतिभा चौहान ने कविता पाठ प्रतियोगिता आयोजित कराई जिस में मुख्य अतिथि के रूप में राजकीय खेड़ी गुजरान महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अमिता मोजूद थी और कार्यक्रम का आरम्भ उन्होंने कार्यवाहक प्रचार्या डॉ सुनिधि के साथ सरस्वती मूर्ति के समक्ष दीप प्रज्वलित कर के किया।
मुख्य अतिथि डॉ. अमिता ने छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व करना चाहिए  हिंदी 2050 तक हिंदी  विश्व की सर्वाधिक शक्तिशाली भाषाओं मै से एक होगी। डॉ. प्रतिभा चौहान ने कविता के माध्यम से बच्चों को संदेश दिया की भाषा को नदी की तरह निर्बाध रूप से बहते रहना देना चाहिए ताकि वो नए रूप, नए आकर में भावों विचारों को व्यक्त कर सकें और कहा कि ” हिंदी दिल के भावों की आवाज़ तुम, रण भूमि में वीरों का आगाज़ तुम। हिंदी, मेरा स्वाभिमान तुम मेरा अभिमान तुम “।
कविता प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के रूप में अंग्रेज़ी विभागाध्यक्ष डॉ. नीरमनी, फरीदाबाद के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का जाना माना नाम डॉ सुनील शर्मा ,संकृत विभागाध्यक्ष डॉ. जोरावर, डॉ. सरोज बाला मोजूद थे और सभी ने अपने अपने शब्दों ने आह्वान किया कि हिंदी भाषा का अपना वजूद है उस की पहचान है इसलिए हमें किसी भाषा से उसकी तुलना करने या बड़ा छोटा साबित करने की अपेक्षा एक भाषा के रूप में  उस का महत्व  प्रतिपादित करना चाहिए। विद्यार्थियों ने इस मौके पर वीर, प्रेम, अनुराग, श्रंगार, हास्य रस की कविताओं से रंग जमा दिया और अंत मै मुख्य अतिथि डॉ. अमिता के साथ, कार्यवाहक प्राचार्या डॉ. सुनिधि व निर्णायक मंडल के सुनील शर्मा, डॉ. सरोज बाला, डॉ. जोरावर नीरमानी व डॉ. प्रतिभा चौहान ने कविता पाठ प्रतियोगिता के विजेताओं को पारितोषिक प्रदान किए और सम्पूर्ण हिंदी विभाग में मीनाक्षी रावत, अमृता, डॉ. ललित, रजनीश, निशा रानी, पूनम अहलावत ने हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर हिंदी भाषा को लेकर विद्यार्थियों को ज्ञान वर्धन किया। इस अवसर पर हिंदी विभाग के साथ से डॉ. विजया, डॉ. हरबंस, डॉ. परवीन, मनोज विशेष रूप से मोजूद थे।

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