सरकारी बैंकों का महाविलय, सरकारी बैंक उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर

27 बैंकों में से सिर्फ 12 सरकारी बैंक रह जाएंगी

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न्यूज़ एनसीआर, 31 अगस्त-फरीदाबाद | केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को सरकारी बैंकों के मेगा कंसॉलिडेशन प्लान की घोषणा की, जिसके बाद देश में 27 सरकारी बैंकों में से सिर्फ 12 सरकारी बैंक ही रह जाएंगी। इस बड़े बदलाव का असर हर उपभोक्ता पर पड़ेगा जिनका इन बैंकों में सेविंग अकाउंट या फिक्स्ड डिपॉजिट है। वित्त मंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में जानकारी दी कि, इस विलय की बाद सिर्फ 12 बैंक ही रहेंगी।
उन्होंने बताया कि, 6 छोटे सरकारी बैंकों का भारतीय स्टेट बैंक में तथा विजया बैंक, देना बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में पहले ही विलय हो चुका है। इस तरह, एसबीआई तथा बैंक ऑफ बड़ौदा विलय के बाद 10 सरकारी बैंकों में पहले ही शीर्ष दो बड़े बैंकों में तब्दील हो चुके हैं।

किस बैंक का किसमें होगा विलय


 

जिस बैंक में होगा विलय जिस बैंक का होगा विलय
पंजाब नैशनल बैंक ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया
केनरा बैंक सिंडिकेट बैंक
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक
इंडियन बैंक इलाहाबाद बैंक
विलय के बाद उपभोक्ता को चैक बुक बदली पड़ेगी

इस विलय के बाद आपका संबंधित बैंकों में अकाउंट है तो सबसे पहले आप अपना चेकबुक बदलने के लिए तैयार हो जाइए। मौजूदा चेकबुक हालांकि कुछ समय के लिए मान्य रहेगा, लेकिन अंततः उन्हें उस बैंक के चेकबुक से बदलना पड़ता है, जिस बैंक में विलय हुआ है।
कस्टमर आईडी और एकाउंट नम्बर में बदलाव

आपको एक नया अकाउंट नंबर और कस्टमर ID मिल सकता है। यह पक्का करें कि आपका ईमेल अड्रेस और मोबाइल नंबर बैंक के पास अपडेटेड हो, जिससे किसी बदलाव के बारे में आपको तुरंत जानकारी मिल सके। आपके सभी अकाउंट एक ID के साथ टैग होंगे। उदाहरण के तौर पर, अगर आपका एक अकाउंट विजया बैंक और एक अन्य देना बैंक के साथ है, तो दोनों अकाउंट के लिए एक कस्टमर ID अलॉट की जाएगी।
थर्ड पार्टीज के साथ डीटेल्स अपडेट करनी होंगी

जिन कस्टमर्स को नए अकाउंट नंबर या IFSC कोड अलॉट किए गए हैं, उन्हें इन डीटेल्स को विभिन्न थर्ड पार्टी एंटिटीज के साथ अपडेट करना होगा। इनमें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, इंश्योरेंस कंपनियां, म्यूचुअल फंड और नैशनल पेंशन सिस्टम (NPS) शामिल हैं
नए ECS, SIP निर्देश

मर्जर के बाद एंटिटी को सभी इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस (ECS) निर्देशों और पोस्ट डेटेड चेक को क्लियर करना होगा। अपने बैंक, फंड हाउस और इंश्योरेंस कंपनी से संपर्क कर नए ECS निर्देश जारी करें। जरूरत होने पर आपको ECS से जुड़ा फॉर्म ऑनलाइन या अपनी ब्रांच के जरिए भरना होगा। ऑटो डेबिट या सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) के लिए आपको नया SIP रजिस्ट्रेशन और इंस्ट्रक्शन फॉर्म भरना पड़ सकता है। ऐसा ही लोन की ईएमआई के लिए भी करना होगा।
डिपॉजिट, लेंडिंग रेट में बदलाव नहीं

ऑफिशल मर्जर की तिथि पर एक्वायर करने वाले बैंक की ओर से ऑफर किया जाने वाला फिक्स्ड डिपॉजिट रेट लागू होगा। हालांकि, मौजूदा फिक्स्ड डिपॉजिट पर मैच्योरिटी तक पहले से तय इंट्रेस्ट मिलेगा। इसी तरह लोन पर इंटरेस्ट रेट भी वास्तविक अग्रीमेंट के अनुसार जारी रहेगा। होम लोन के लिए मौजूदा इंट्रेस्ट रेट तब तक बरकरार रहेगा, जब तक नई एंटिटी इंट्रेस्ट रेट में बदलाव नहीं करती।

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