जम्मू कश्मीर पर बड़ा फ़ैसला, 370 और 35A का सफाया

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न्यूज़ एनसीआर, (शारा गर्ग) 5 अगस्त – फरीदाबाद | गृहमंत्री अमित शाह ने आज राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर को लेकर सरकार का संकल्प पत्र पेश किया। शाह ने कहा कि कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 को हटा दिया गया है। गृहमंत्री ने इसके साथ ही आर्टिकल 35A भी हटाए जाने का ऐलान किया। शाह ने कश्मीर के पुनर्गठन प्रस्ताव भी पेश किया है, उनके बयान के बाद राज्यसभा में विपक्ष का जोरदार हंगामा शुरू हो गया है। इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में उनके घर पर कैबिनेट की मीटिंग हुई, बताया जा रहा है कि इसी मीटिंग में कश्मीर को लेकर तीन बड़े फैसले लिए गए।

क्या है आर्टिकल 370?

जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा ने 27 मई, 1949 को कुछ बदलाव सहित आर्टिकल 306ए (अब आर्टिकल 370) को स्वीकार कर लिया। भारतीय संविधान को 26 नवंबर, 1949 को अंगीकृत किया गया था। लेकिन इससे करीब एक महीना पहले 17 अक्टूबर, 1949 को आर्टिकल 306ए भारतीय संविधान का हिस्सा बन गया। ‘इंस्ट्रूमेंट्स ऑफ ऐक्सेशन ऑफ जम्मू ऐंड कश्मीर टु इंडिया’ की शर्तों के मुताबिक, आर्टिकल 370 में यह उल्लेख किया गया कि देश की संसद को जम्मू – कश्मीर के लिए रक्षा, विदेश मामले और संचार के सिवा अन्य किसी विषय में कानून बनाने का अधिकार नहीं होगा। साथ ही, जम्मू-कश्मीर को अपना अलग संविधान बनाने की अनुमति दे दी गई

35 ए के तहत:-

  • हर वो शख्स सूबे का स्थायी नागरिक होगा जो 14 मई 1954 से पहले स्टेट सब्जेक्ट है या 10 साल से सूबे में रह रहा हो और कानूनी तरीके से अचल संपत्ति खरीदी हो।
  • जो स्थायी नागरिक नहीं है, उन्हें कश्मीर में स्थायी तौर पर रहने, अचल संपत्ति खरीदने, सरकारी नौकरी पाने इत्यादि का अधिकार नहीं है।
  • दूसरे सूबे के अस्थाई नागरिकों को स्कॉलरशिप भी नहीं मिल सकती।
  • यह आर्टिकल जम्मू-कश्मीर राज्य को अधिकार देता है कि कोई महिला अगर किसी दूसरे स्टेट के स्थायी नागरिक से शादी करती हैं तो उसकी कश्मीरी नागरिकता छीन ली जाए। हालांकि, साल 2002 में जम्मू – कश्मीर हाईकोर्ट के एक आदेश के मुताबिक शादी करने वाली महिला की नागरिकता खत्म नहीं की जाएगी, लेकिन उनके होने वाले बच्चों को यह अधिकार नहीं मिलेगा।

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