विधायक रहीसा खान 2 जून को देंगे दावत-ए-इफ्तार पार्टी

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न्यूज़ एनसीआर, (उदयचंद माथुर) 01 जून-हथीन | हिंदू- मुस्लिम भाईचारे को आगे बढ़ाते हुए विधायक रहीसा खान द्वारा 2 जून रविवार को रमजान की दावत-ए-इफ्तार पार्टी का आयोजन किया जा रहा है। जिसमे उनके द्वारा हजारों की संध्या में रोजेदारों का रोजा खुलवाया जाएगा। जानकारी देते हुए रहीस खान ने बताया कि कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। क्षेत्र के सभी गणमान्य से लेकर आमजन को भी न्यौता दिया जा रहा है। कार्यक्रम में विधानसभा के सभी गांवों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचकर रोजा खोलेंगे। उन्होंने बताया कि रमजान बडा पाक माह है जिसमे एक-दूसरे की खिदमत करने का बडा महत्व है। जिसको लेकर इ तार पार्टी का आयोजन किया जा रहा है।

रहीसा खान ने कहा कि जिले में हिंदू मुस्लिम जैसा भाईचारा देश के किसी भी कोने में नहीं है। यहां के लोग एक-दूसरे के त्योंहारों को मिलजुल कर मनाते हैं। इस कडी को आगे बढ़ाते हुए रोजा इफ्तार पार्टी का आयोजन किया जा रहा है। जिसमे दोनों समुदाय के हजारों लोग शामिल होंगे। उन्होने बताया कि अल्लाह के प्यारे नबी हजरत मुहम्मद साहब का फरमान है कि दीन की रोशनी में ङ्क्षजदगी संवारें। अच्छाई और सच्चाई अपनाएं। रमजान का मुबारक महीना यही सबक सिखाता है और नेकियां कमाने का मौका भी देता है। बुराई से बचो और अच्छाई को अपनाओ। हम अपने घर-परिवार, पड़ोसी, समाज और वतन की सोचें। ईमान को कायम रखें। असल ङ्क्षजदगी को समझें। झूठ से बचें। रोजे आते हैं और हमें याद दिलाते हैं कि कभी ईमान की राह न छोड़ो। हर रोजे की अपनी अहमियत है। रोजे के दौरान हम सहरी और इफ्तारी करते हैं। ऐसा करके हम सवाब कमाते हैं। यह न भूलें कि रोजेदार पर अल्लाह की रहमत बरसती है। जो लोग इफ्तार दावत का आयोजन करते हैं, उन्हें भी सवाब मिलता है। खुशी की बात है कि आज बहुत से लोग भेदभाव भुलाकर इफ्तार दावत में शिरकत करते हैं। इससे मुहब्बत बढ़ती है। रमजान का पैगाम भी यही है कि हम अच्छे इंसान बने रहें, औरों के लिए भी बेहतर साबित हों। हम आम दिनों में रोजाना नमाज पढ़ते हैं। रमजान में तरावही की नमाज होती है। इस इबादत की ज्यादा अहमियत है। अल्लाह, रसूल के बताए रास्ते पर चलते हुए ही हमें जन्नत नसीब होगी। आओ हम सब इस मुबारक महीने में जरूरतमंद के काम आएं औरों की रुह खुश होगी तो दुआएं मिलेंगी।

उन्होंने कहा कि पाक कुरान में लिखा है कि सभी धर्मो के लोग बराबर है और सभी की आबरू अपने से बढक़र है। इसलिए सभी धर्मो के लोगों की इज्जत करो। अल्लाताला ऐसे लोगों को जन्नत नसीब करता है। रमजान का माह शबाब का महीना है। इस माह में हर लोगों को गुनाह से बचना चाहिए और अधिक से अधिक खैरात दी जानी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति रमजान माह में 1 रूपये खैरात करता है तो अल्लाताला उसे कई गुणा देता है। रमजान माह में रोजेदार को आंख, कान, नाक सहित मस्तिक का भी रोजा करना चाहिए। इसका मतलब है कि आंखों से गलत मत देखों और कान से गलत मत सुनों, वहीं नाक से कोई अपत्तिजनक गंद को मत सुंधो। उन्होंने कहा कि रमजान का अंतिम हिस्सा चल रहा है जो जहन्नम से बचने का रास्ता है। यह समय कब्र के अजाप व जहन्नम से बचने की दुआ मांगनी चाहिए। रमजान माह में तराबी की नमाज एक फर्ज है जिसे जरूर पढऩी चाहिए।

अल्लाह ने हमें पैदा किया, इतनी नेमतें बख्शीं, जिसे हम लफ्जों में बयान भी नहीं कर सकते। इस महीने में हम रोजा रखते हैं तो गरीबों और यतीमों की मदद का भी हुक्म है। इस तरह रमजान इंसानियत की बात करता है। रोजे के दौरान खाने-पीने का परहेज तो है ही, इस बात की भी अहमियत है कि हम अपनी इच्छाओं पर काबू रखें। भाईचारे का संदेश दें, एक-दूसरे से मुहब्बत करें। रोजा रखने से सवाब मिलता है। रोजेदार को इफ्तारी कराना भी नेकी का काम है। रमजान में जकात बांटने का हुक्म है। बाहैसियत लोग इस महीने में गरीबों में नकदी और उपहार दान करते हैं। अल्लाह और रसूल का फरमान है कि हमें शरीयत पर चलना चाहिए। हम अपने दीन को कायम रहें। अपने मुल्क की तरक्की के लिए शांति बनाए रखें। अब ईद आने वाली है। ईद पर जरूरतमंद लोगों के काम आएं। हर घर में ईद हो, हमें इसका ख्याल रखना चाहिए। अल्लाह अपने उन बंदों से राजी रहता है, जो दीन की रोशनी में जिदगी संवारते हैं।

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