मिशन जाग्रति ट्रस्ट ने मनाया ‘विश्व बाल मजदूरी निषेध’ दिवस

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न्यूज़ एनसीआर , 11जून-फरीदाबाद | मिशन जाग्रति के द्वारा विश्व बाल मजदूरी निषेध दिवस कि पूर्व संध्या पर पाठशाला के बच्चों द्वारा एक नाटक प्रस्तुत किया गया। यह नाटक राष्ट्रीय बाल श्रमिक परियोजना की अधिकारी रुक्मणी के दिशा-निर्देश में किया गया। इस नाटक के माध्यम से शिक्षा की जरुरत को बताया गया। इस नाटक को त्यार करवाने में हिमांशु भट्ट, कोमल और मनीष का विशेष योगदान रहा।
संस्था के संस्थापक प्रवेश मलिक ने कहा कि, बचपन इंसान की जिंदगी का सबसे हसींन पल होता है इस उम्र में न किसी बात की चिंता और जिम्मेदारी होती है बस हर समय अपनी मस्तियों में खोए रहना, खेलना-कूदना और पढ़ना लेकिन सभी का बचपन ऐसा हो यह होना जरूरी नहीं। आज दुनिया भर में 215 मिलियन ऐसे बच्चे हैं जिनकी उम्र 14 वर्ष से कम है और इन बच्चों का समय स्कूल में कॉपी-किताबों और दोस्तों के बीच न हो कर बल्कि होटलों, घरों, उद्योगों में बर्तन धोने, झाड़ू-पोंछे और औजारों के बीच बीतता है। पाठशाला के प्रोजेक्ट डायरेक्टर महेश आर्य ने बताया कि दुनिया में सबसे ज्यादा बाल मजदूर भारत में ही हैं। उन्होंने बताय की 1991 की जनगणना के हिसाब से बाल मजदूरों का आंकड़ा 11.3 मिलियन था। 2001 में यह आंकड़ा बढ़कर 12.7 मिलियन पहुंच गया।
एनजीओ की सलाह्कार आशा भड़ाना के अनुसार एक मात्र शिक्षा की ही सीढ़ी है जो बाल मजदुरो को गरीबी के दल दल से बाहर निकाल सकती है आशा ने बताया कि बड़े शहरों के साथ-साथ आपको छोटे शहरों में भी हर गली नुक्कड़ पर कई राजू-मुन्नी-छोटू-चवन्नी मिल जाएंगे जो हालातों के चलते बाल मजदूरी की गिरफ्त में आ चुके हैं। जिनका बच्चों के मासूम मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। आशा के अनुसार 50.2 प्रतिशत ऐसे बच्चे हैं जो सप्ताह के सातों दिन काम करते हैं। 53.22 प्रतिशत यौन प्रताड़ना के शिकार हो रहे हैं। 50 प्रतिशत बच्चे शारीरिक प्रताड़ना के शिकार हो रहे हैं। मिशन जाग्रति एनजीओ समाज में फैली इस कुरीति को पूरी तरह नष्ट करने का प्रयास कर रही हैं।
महेश आर्य ने बताया कि मिशन जाग्रति के द्वारा फरीदाबाद शहर में पिछले साल अक्टूबर माह से भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय एवं राष्ट्रीय बाल श्रमिक परियोजना के माध्यम से फरीदाबाद में दो स्कूल चलाये जा रहे है जिनमे लगभग 60 बच्चे शिक्षित हो रहे है जिनको मिशन जाग्रत के अध्यापकों के द्वारा लगातार उनके भविष्य को उज्जवल किया जा रहा है जिनमे महेश आर्य, मनीष, कोमल, नीतू, प्रिया, विकास कश्यप, स्वाति, सुनीता, कामनी बंगा, सुष्मिता, किरण, ज्योति, अनुष्का, आँचल, सोनल मान, प्रभा सोलंकी, धर्मबीर, अनुवर्त, विपिन शर्मा, राजेश भूटिया, विकास चौधरी, दिनेश का विशेष योगदान है।
डॉ सुभाष श्योराण के अनुसार भारत में बाल मजदूरों की इतनी अधिक संख्या होने का मुख्य कारण सिर्फ और सिर्फ गरीबी है उन्होंने कहा यहां एक तरफ तो ऐसे बच्चों का समूह है जो बड़े-बड़े मंहगे होटलों में 56 भोग का आनंद उठाते है तो दूसरी तरफ ऐसे बच्चों का समूह है जो गरीब हैं और दूसरों की जूठनों के सहारे वे अपना जीवनयापन करते हैं।
जब यही बच्चे दो वक्त की रोटी कमाना चाहते हैं तब इन्हें बाल मजदूर का हवाला देकर कई जगह काम ही नहीं दिया जाता। आखिर ये बच्चे क्या करें, कहां जाएं ताकि इनकी समस्या का समाधान हो सके। सरकार ने बाल मजदूरी के खिलाफ कानून तो बना दिए। इसे एक अपराध भी घोषि‍त कर दिया लेकिन क्या इन बच्चों की कभी गंभीरता से सुध ली? इस बारे में मिशन जाग्रति के संरक्षक तेजपाल सिंह ने कहा कि बाल मजदूरी को जड़ से खत्म करने के लिए जरूरी है गरीबी को खत्म करना। इसके लिए सिर्फ सरकार की ही नहीं आम जनता की भी सहभागिता जरूरी है।

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