खुद पर काम करें और दुनिया को बदलते देखें : पीयूष भाटिया

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न्यूज़ एनसीआर, (प्रीति चीमा) 08 मई-फरीदाबाद | हम हमेशा से ही कहीं न कहीं दूसरो को बदलने की सलाह देते हैं लेकिन जब यह बात अपने उपर आती है तब हम उस बात को टालने की कोशिश करते हैं। हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि गलती करने वाला इन्सान हमेशा दूसरा ही हो यह जरूरी नहीं है। हमें खुद के अन्दर के दोषों को भी गिनना आना चाहिए अर्थात हमें खुद कि कमियों पर भी काम करना आना चाहिए। इन्ही कमियों के चलते हम कईं बिमारियों जैसे तनाव (स्ट्रेस्स), उच्च रक्त चाप (हाई बी पी), डिप्रेशन, मधुमेह (शूगर) जैसी अनेक बिमारियों के शिकार हो जातें हैं और क्या आप जानते हैं कि एमोशंस का हमारे स्वास्थ्य पर कितना गंभीर असर पड़ता है? क्या आप भी इन बिमारियों से जूझ रहें हैं और इसके चलते अधिक मात्रा मे दवाईयों का सेवन करने लगें हैं? अगर हाँ तो आप को खुद पर काम करने की आवश्यकता है कयोंकि अपने शरीर का ख्याल आपसे बेहतर कोई नहीं रख सकता।
भावनाओं के चलते हम अपने शरीर पर ध्यान नही दे पाते और अंत हम बिमारियों से घिर जाते हैं। जरूरी नही है के हर बिमारी का इलाज बस दवाईयों से ही हो कभी-कभी हमें इनका इलाज आध्यात्मिक ज्ञान और ध्यान में भी ढूँढना चाहिए। हम सबने कर्म (कर्मा) के बारे में पढ़ा और सुना बहुत है पर हम यह भूल जातें हैं कि यह सच होता है। हमें अपनी बाहरी खूबसूरती के आगे कुछ और दिखता ही नही है जबकि हमें अपने अन्दर छिपे अवगुण दिखाई ही नहीं देते।
हम सब ने ‘डी.एन.ए’ (DNA) के बारे पढ़ा, लिखा और सुना बहुत है पर क्या हम जानते है कि हमारे शरीर में 92% डी.एन.ए जंक यानी की कचरा है? जी हाँ आप सही पढ़ रहे है। हमारे शरीर मे यह एक कचरे की तरह है क्योंकि हम मे से कईं लोगों को इसके बारे मे अधिक जानकारी नही है और जिन्हें जानकारी है उन्हे इस का सही इस्तेमाल नही आता है। इन सब का सही इस्तेमाल करना हमारा उद्देश्य होना चाहिए। हमें अपनी अंतरात्मा पर काम करना आना चाहिए क्योंकि एक मात्र अंतरात्मा ही है जो हमें आंतरिक खूबसूरती और शांती प्रदान करती है। जिसकी वजह से हम अपने आपसी रिश्तों में मधुरता ला सकतें हैं और आपने जीवन में खुशहाल रह सकतें हैं।
इन सब के बारे मे पियूष ने जानकारी दी और बताया की यह सब हमारी जिन्दगी में बहुत मेह्तव रखते हैं। इन सब की जानकारी पियूष ने अपनी एक वर्कशाप में दी जिसमे 30 के करीब लोग थे और जिनमें से कुछ लोगों की ज़िंदगी पियूष से कोचिंग लेने के बाद बदल ही गयी हैं। और आने वाली 18 मई 2019, को भी पियूष एक एसी ही वर्कशाप करने वाली हैं। पियूष रोज़मर्रा की ज़िंदगी में महीने में दो बार इस तरह के सेशन लेती हैं जो की वन-आन-वन होते हैं यानी की प्रत्येक व्यक्ति को अलग से समय दिया जाता है।

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