नोटबंदी के दो साल बाद भी नहीं चल रहे 10 व 1 के सिक्के, भारतीय मुद्रा का हो रहा अपमान

भिखारी भी लेने से कर देते हैं मना

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न्यूज़ एनसीआर, (उदयचंद माथुर) 09 फरवरी-हथीन | देश की राजधानी दिल्ली से मात्र 70 किलोमीटर दूर हथीन में 10 रुपये का व 1 रुपये का छोटा सिक्का दुकानदारों द्वारा नहीं स्वीकारा जा रहा है। जिसके चलते जनसाधारण को भारी परेशानी के साथ साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड रहा है। यह स्थिति तो तब है जबकि आरबीआई का साफ तौर पर कहना है कि सभी सिक्के वैध हैं। इसके बावजूद भी इन सिक्कों को न तो दुकानदार लेते हैं और ना ही बैंक स्वीकार कर रहे हैं। इतना ही बल्कि भिखारी भी इन सिक्कों को लेने से साफ इंकार कर देते हैं। दुकानदार योगेश गोयल का कहना है कि पहले मैंने ग्राहकों से 10 -10 सिक्के खूब लिए थे। लेकिन इन सिक्कों को हम से न तो होलसेल दुकानदार लेते हैं और न बैंक। अब बताओ मैं क्या करूं ?  इसलिए मजबूरीवश मैने भी ग्राहकों से उक्त सिक्के लेने बंद कर दिए हैं।
यह स्थिति केवल हथीन की ही नहीं बल्कि पूरे पलवल जिले सहित अन्य कई जिलों की है। हथीन के अलावा पलवल, होडल, बल्लभगढ़, फरीदाबाद, नूंह , पुन्हाना, पिनगवां, फिरोजपुर झिरका, तावडू , रेवाडी, गुरूग्राम, सोहना, नारनौल, महेंद्रगढ़ आदि में इन सिक्कों का प्रचलन बंद है।
नोटबंदी के बाद उत्पन्न हुई यह स्थिति 

नवंबर 2016 में जब नोटबंदी हुई थी तब बाजार में बडे पैमाने पर ये सिक्के उतारे गए थे। ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पडे। लेकिन अब वो ही सिक्के लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। जिन्हें न तो बैंक ले रहा है और न दुकानदार। यहां तक कि भिखारी भी इन सिक्कों को लेने से मना कर देते हैं। जिससे भारतीय मुद्रा का खुलेआम अपमान हो रहा है।

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