मिल्कफ़ूड के घी में पशुओं की चर्बी, हो सकती कैंसर जैसी भयानक बीमारी : वरुण

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न्यूज़ एनसीआर, 11 जनवरी-फरीदाबाद | फरीदाबाद के आरटीआई एक्टिविस्ट वरुण श्योकंद ने घी के ब्रांडेड कंपनी मिल्कफूड के मिलावटी घी का भांडाफोड़ प्रेसवार्ता में किया। प्रेसवार्ता को पदमश्री डॉ. ब्रह्मदत्त, डॉ. विश्वरूप रॉय चौधरी, अनशनकारी बाबा रामकेवल व आरटीआई कार्यकर्ता वरुण श्योकंद ने संबोधित किया। उन्होंने मिल्कफूड कंपनी के मिलावटी घी का भंडाफोड़ किया। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों के प्रोडक्ट्स के सैंपल की जांच करवाई गई जिनमें बड़े पैमाने पर मिलावट पाई गई है। इनमें बल्लभगढ़ की रमेशा डेरी तथा ब्रांडेड कंपनी मिल्क फूड के प्रोडक्ट्स में मुख्य रूप से मिलावट पाई गई है।
पदमश्री डॉ. ब्रह्मदत्त ने कहा कि, क्या नेताओं और अधिकारियों को नहीं पता कि उनके क्षेत्र में क्या हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब एक आम नागरिक को इन भ्रष्टाचारियों का पता रहता है तो यह नेता और अधिकारी किस तरह अंधे बने रहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार व प्रशासन की देखरेख में यह सभी मिलावटखोरी के धंधे चल रहे हैं और ऊपर तक मोटा पैसा बंटता है। उन्होंने वरुण श्योकंद व मीडिया का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे गर्व है वरुण श्योकंद और फरीदाबाद की मीडिया पर जिनका भ्रष्टाचारियों को नंगा करने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि हम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे और हम इस मुद्दे को लेकर क्रिमिनल केस भी दायर करेंगे।
वरुण श्योकंद ने कहा कि आम दुकानों पर बिकने वाले सस्ते की से ज्यादा मिलावटी ब्रांडेड कंपनियों के घी हैं जिनमें ज्यादातर जानवरों की चर्बी पाई गई है। उन्होंने पूरी जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि हमने दिल्ली की रेप्युटेड लैब से यह टेस्ट करवाए हैं। उन्होंने कहा कि शहर के सभी रेस्टोरेंट्स, छोटे-छोटे स्टोल वाले सस्ते के चक्कर में देसी घी के नाम पर इसी का इस्तेमाल करते हैं जो की बीमारियों का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि यह मिलावटखोरी का व्यापार सरेआम चल रहा है। बल्लभगढ़ के विधायक के क्षेत्र में ही सैकड़ों दुकाने हैं। आखिर विधायक जी और फ़ूड इंस्पेक्टर क्या कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि क्या इनके पास मोटा पैसा पहुंच रहा है जो इन्हें दिखाई नहीं दे रहा, क्या यह संभव है कि उनकी नाक के नीचे यह सब चल रहा है और उन्हें पता भी ना हो। उन्होंने कहा कि शायद यह कुछ भ्रष्ट लोगों की मिलीभगत हो सकती है ताकि ऐसे घी से भी मुनाफा कमाएं और फिर लोग बीमार पड़े तो हॉस्पिटलों के द्वारा भी पैसा कमाया जाए। उन्होंने कहा कि हम इससे आगे और भी बड़ी-बड़ी कंपनियों के नाम उजागर करेंगे, जो काम सरकार और प्रशासन का है वह हमें करना पड़ रहा है और मीडिया के माध्यम से उनके पास संदेश भी पहुंचाया जा रहा है।
अनशनकारी बाबा रामकेवल ने कहा कि बदलाव के लिए क्रांति और आंदोलन की जरूरत पड़ती है और हम कोर्ट में तो जाएंगे ही साथ ही जब शासन-प्रशासन सुस्त हो जाते हैं तो विरोधी आंदोलन की जरूरत होती है जो हम जल्द करेंगे। उन्होंने कहा कि ये लोग शहर को बर्बाद करने में तुले हुए हैं जो हम होने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि हम चुप बैठने वाले नहीं हैं और एक बड़े विरोधी आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं जिसके जिम्मेदार सरकार व प्रशासन स्वयं होंगे। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने भी इस शहर को बर्बाद करने की कोशिश की है उन्हें हम किसी भी कीमत पर ऐसा नहीं करने देंगे और आंदोलन होगा जरूर होगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन हर तरह के भ्रष्टाचार के खिलाफ होगा जैसे भूमाफियाओं, पर्यावरण रक्षा, रिश्वतखोरी, मिलावटखोरी, राजनीतिक या प्रशासनिक भ्रष्टाचार आदि।
डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी ने कहा कि बिजनेस में अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए कंपनियां लोगों की जान की परवाह किए बिना मिलावट करती हैं। उन्होंने कहा कि आमतौर पर आरएम वैल्यू कम से कम 28 होनी चाहिए जो कि इन रिपोर्ट्स में 3.3 ही पाई गई है जो कि स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने कहा कि यह कंपनियां घी में खासतौर पर वेजिटेबल व जानवरों की यूज़लेस चर्बी को मिलाते हैं। उन्होंने कहा कि इस घी को खाने वाले शाकाहारी नहीं रह गए हैं क्योंकि इसमें पशुओं की चर्बी मिलाई जाती है। उन्होंने कहा कि यह मिलावटी घी लोगों के लिए जानलेवा है जो कि हृदय, पैंक्रियास, किडनी, लीवर व मस्तिष्क को बुरी तरह से प्रभावित करके हार्ट अटैक, मानसिक रोग, किडनी फैलियर, कैंसर, एक्यूट पेनक्रिएटाइटिस, बीपी, शुगर व नंपुसकता जैसी बीमारियों को तेजी से पैदा करता है।

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