चुनाव में वीवीपैट मशीन के प्रयोग से ईवीएम में नहीं होगी गडबडी

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न्यूज़ एनसीआर, (उदयचंद माथुर) 12 जनवरी-फरीदाबाद | चुनाव में पारदर्शिता व विश्वसनियता के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा इस बार ईवीएम के अलावा वीवीपैट (वोटर वैरीफाईड पेपर ऑडिट ट्रेल) मशीन का भी प्रयोग होगा। जिसके चलते जिला निर्वाचन अधिकारी के आदेशानुसार ईवीएम एवं वीवीपैट ट्रैनर कृष्ण चौहान और राकेश कुमार ने शुक्रवार को लघु सचिवालय हथीन में कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया और वीवीपैट मशीन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। ट्रेनर कृष्ण चौहान ने बताया कि वीवीपैट मशीन को ईवीएम के साथ कनैक्ट किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस मशीन का यह फायदा होगा कि जब भी कोई मतदाता ईवीएम का इस्तेमाल करते अपना वोट देता है तो इस मशीन में वह उस प्रत्याशी का नाम और चुनाव चिन्ह देख सकता है जिसे उसने वोट दिया है। उन्होंने बताया कि वीवीपैट मशीन के तहत वोटर विजुअली 7 सैकेंड तक यह देख सकेगा कि उसका मत उसकी इच्छा अनुसार उसके प्रत्याशी को मिला है या नहीं।
क्या है वीवीपैट

वीवीपैट यानि वोटर वैरीफाईड पेपर ऑडिट ट्रेल इस व्यवस्था के तहत मतदाता के वोट डालने के तुरंत बाद कागज की एक पर्ची बनती है। इस पर जिस उम्मीदवार को वोट दिया गया है, उसका नाम और चुनाव चिन्ह छपा होता है। क्यों लाई गई यह मशीन यह व्यवस्था इसलिए की गई है, ताकि किसी तरह का कोई विवाद न हो। ईवीएम में पडे वोट के साथ पर्ची का मिलान आसानी से किया जा सकता है। जिससे विवाद की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी और कोई भी पार्टी ईवीएम में गडबडी का आरोप नहीं लगा सकेगी। विवादों से निपटने में मददगार होगी वीवीपैट वीवीपैट मशीन में मतदाता की जानकारी को प्रिंट करके स्टोर कर लिया जाता है और विवाद की स्थिति में स्टोर की जानकारी की उपलब्ध कराके समस्या को निपटाने में यह मशीन मददगार साबित होगी।
बनाए गए हैं सख्त नियम

चुनाव आयोग ने वीवीपैट मशीन को लेकर बेहद सख्त नियम भी बनाए हैं। आयोग का नियम है कि यदि कोई ये दावा करता है कि उसने जिसे वोट किया है, पर्ची उस उम्मीदवार के चुनाव चिन्ह की नहीं निकली है तो उसे एक घोषणा पत्र भरकर देना होगा। जिस पर जांच की जाएगी। शिकायत झूठी मिलने पर 6
महीने की जेल या 1000 रूपये जुर्माना अथवा दोनों सजा हो सकती हैं।

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