सफलता पाने के लिए विश्वविद्यालय और उद्योग अनुसंधान कार्यालय को आपस में जुड़ना होगा: जावड़ेकर

0
28
न्यूज़ एनसीआर, 04 अक्टूबर-फरीदाबाद | विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय कार्य समूह और आईआईएलएम संस्थान, दिल्ली के सहयोग से 1 अक्टूबर 2018 को शिक्षा के माध्यम से अधिकतम रोजगार की दिशा में एक पहल पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया है।
विश्वविद्यालय और उद्योग अनुसंधान के साथ निकट संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।

कार्यशाला का उद्धघाटन करते हुए माननीय केंद्रीय मंत्री एचआरडी प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि विश्वविद्यालयों / शिक्षा प्रतिष्ठानों में समय-समय पर परिवर्तन और उद्योग और अनुसंधान के साथ निकट समन्वय के साथ पाठ्यचर्या संशोधन अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
कामयाबी पानी है तो उद्योग अनुसंधान केंद्र से से जुड़ना होगा

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उद्योग और अनुसंधान केंद्र एक-दूसरे के साथ जुड़ते हैं तो अवश्य ही कामयाबी मिलेगी। उन्होंने बताया कि व्यावसायिक कार्यक्रम की जरूरतों के अनुसार अभ्यास के लिए अनुसंधान केंद्र प्रयोगशालाओं का उपयोग करते हैं। उन्होंने 2020 तक बीए प्रोफेशनल और बीएससी पेशेवर कार्यक्रम शुरू करने के विचार के बारे में भी बात की जो कि सामान्य की बजाय नौकरी उन्मुख होगी। इस मौके पर माननीय केंद्रीय मंत्री की का स्वागत करते हुए राज नेहरू ने कार्यशाला पर रौशनी डालते हुए कहा कि तकनीकी व्यवधान और नवाचारों ने अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया है। जिसके परिणामस्वरूप रोजगार उत्पादन और संसाधनों की उपलब्धता पर असर हुआ है।
भारत के विश्व गुरु बनाने के सपने को है साकार करना है तो आधुनिकता के साथ-साथ अपने सांस्कृतिक मूल्य को भी मजबूत बनाना होगा।

जहाँ एक तरफ भारत की युवा शक्ति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी ताकत बन कर उभर सकती है। वही दूसरी तरफ इनके लिए समर्थ संसाधनों की व्यवस्था एक विचारणीय विषय है। हम भारतीय इतिहास पर नज़र डालें तो पातें हैं कि प्राचीन भारत में अभाव कि कभी कोई स्थिति नहीं रही और यह विभिन्न क्षेत्रों के साथ-साथ कौशल शिक्षा का भी मूल था। अगर हमें भारत को फिर विश्व गुरु बनाने के सपने को साकार करना है तो हमे आधुनिकता के साथ-साथ अपने मूल्यों को भी मजबूत बनाना होगा। लिंग परिदृश्य, प्रौद्योगिकी, नवाचार तथा तीव्र तकनीकि विकास के एक बड़े पैमाने पे रोजगार जगत का स्वरूप बदलना तय है। क्या हम अपने युवाओं को समकालीन मांग के अनुसार कौशल प्रशिक्षित करने के लिए तैयार हैं? यह सुनिश्चित करने के लिए हमारी कौशल रणनीति क्या होनी चाहिए कि हमारे युवाओं के पास भविष्य की अर्थव्यवस्था में आवश्यक कौशल कौन से हैं? इस प्रकार के सभी सवालों के जवाब हमे समय पर तलाश कर उन्हें क्रियन्वित करना होगा इस कार्यशाला का उद्देश्य सभी भागीदारों के साथ मिलकर एक सार्थक समाधान खोजना है।

पूरी योजना पर क्या कहना है लोगों का

डॉ. अनिरुद्ध देशपांडे ने इस प्रयास की सराहना की तथा कहा कि शिक्षा केन्द्रो को और उद्योगों को एक साथ मिल कर नवभारत निर्माण करना होगा।
संजीव भिक्चंदानी, एमडी नौकरी.कॉम, ने उभरते परिदृश्य में रोजगार के अवसरों, चुनौतियों, आर्थिक विकास पर प्रकाश डाला। वहीं दूसरी ओर पद्मजा रुपल अध्यक्ष-इंडियन एंजेल नेटवर्क ने अपने व्यक्तवय में रोजगार पाने की नई अपितु रोजगार देने वाला बने इस पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत में नौकरी निर्माण और रोजगार में स्टार्टअप की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, मुद्रा बैंकिंग इत्यादि जैसी पहल सभी एक अरब से ज्यादा लोगों को अवसर प्रदान करने के लिए प्रयासरत हैं। नासकॉम के मुताबिक, भारत का वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप बेस है और 2020 तक 10,000 से अधिक नए स्टार्टअप होने का अनुमान है।स्टार्टअप को किस प्रकार एक मजबूत संरचना के रूप में विकसित किया जा सकता है।
कार्यशाला उद्योग और नीतिगत विशेषज्ञ की एक आकाशगंगा है

वहीं डॉ. भगवती प्रसाद संयोजक, रोज़गार पर राष्ट्रीय कार्य समूह ने साझा किया कि यह कार्यशाला अकादमिक, उद्योग और नीतिगत विशेषज्ञों की एक आकाश गंगा है और इसका उद्देश्य कुछ तार्किक और व्यावहारिक समाधानों पर पहुंचना है। कार्यशाला में रोजगार के विकास के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा कि जाएगी। जिसमें मुख्यत कृषि स्टार्टअप की दिशा में भी चर्चा की आवश्यकता है।

कुलपति राज नेहरू ने कार्यशाला के अंत में बताया की कुछ चीजें हमारी जो आज के कार्यक्रम से जुड़ी है। वह माननीय मंत्री के ध्यान में आई और कुछ चीजों को सबके ध्यान में माननीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी हमारे ध्यान में लाये जैसे कि वर्ल्ड इकोनामिक फोरम का जो सर्वे है उस सर्वे में बदलते हुए समय के साथ जो नई टेक्नोलाॅजी है। उस वर्ल्ड टेक्नोलॉजी से जॉब के ऊपर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने एक सुझाव दिया कि यूनिवर्सिटी कोर्स फीस स्टडी करना चाहिए कि आने वाले अगले 20-25 वर्ष में किस प्रकार के जॉब मार्केट में होंगे जॉब के लिए एडवांस में यूनिवर्सिटी रिसोर्सेज को तैयार कर सकती है साथ ही प्रकाश जावेडकर मंत्री हुमन रिसोर्स डेवलपमेंट ने एक बहुत बढ़िया सुझाव दिया किस प्रकार से अपने अकैडमी या टेक्नोलॉजी को बदलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि उनको लगता है बहुत अच्छे सुझाव उनकी ओर से भी आज इसमें आए हैं और आज जितने भी पार्टिसिपेट ने भाग लिया चाहे वह अकैडमी आये थे चाहे वह इंडस्ट्री से आये थे। उन सभी को इस बात से लाभ मिलेगा कि वह वापस जाकर कैसे इनको अप्लाइड और इंप्लीमेंट करेंगे।
इस कार्यशाला के अवसर पर माननीय केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेडकर और मानव संसाधन मंत्री ने कार्यशाला आयोजन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उनके साथ समाज सेवक अनिरुद्ध और नंदलाल चार्टर्ड अकाउंटेंट कुलपति आरके मित्तल, भगवती लाल कुलपति उदयपुर यूनिवर्सिटी और कार्यशाला समापन समारोह में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पेट्रोलियम एवं स्किल डेवलपमेंट मंत्री समाज सेवक कश्मीरी लाल, समाज सेवक मुकंदा आईआई एल एम यूनिवर्सिटी के चेयरमैन राय साहब, वाइस चांसलर सुजाता व अन्य समाज सेवक एवं शिक्षाविद इंडस्ट्रीज से आए हुए अन्य गणमान्य लोग इस कार्यशाला में उपस्थित रहे और अपनी-अपनी पैनल में पैनलिस्ट के रूप में पार्टिसिपेट किया और राष्ट्र में पूर्ण एम्पलाईेबिलिटी के लिए अपने सुझाव दिए

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here