देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का सपना सिर्फ सपना ही रह जाएगा : राशिद खान

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न्यूज़ एनसीआर, 03 अक्टूबर-फरीदाबाद | जिला बाल कल्याण अधिकारी और लेखाकार गबन का मामला अब अपनी अंतिम जाँच की तरफ बढ़ रहा है। बशर्ते सरकार और प्रशाशन जाँच रिपोर्ट को गहनता से देख कर फैसला करें।

आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला


आपको बता दें की आरटीआई कार्यकर्त्ता राशिद खान ने बाल कल्याण विभाग फरीदाबाद में आरटीआई के माध्यम से तत्कालीन जिला बाल कल्याण अधिकारी सज्जन सिंह और अकॉउंटेंट उदयचंद की नियुक्ति और उनके द्वारा किये गए खर्चे की रिपोर्ट मांगी थी। साथ ही इस बात की जानकारी भी मांगी थी की ये दोनों के पास उक्त खर्चा करने और बिल पास करने का अधिकार हैं भी या नहीं । बता दें कि राशिद खान ने ये सभी जानकारी सन 2011 में मांगी थी। लेकिन न जाने किस दबाव के चलते पहले तो जानकरी ही उपलब्ध नहीं करवाई परंतु जब जानकरी सामने आई तो चंडीगढ़ तक के अधिकारीयों ने भी इस घोटाले पर आंखे बंद रखी।

पूरे मामले पर क्या था कोर्ट का फैसला


अंत में याचिकाकर्ता को कोर्ट की शरण में जाना पड़ा। कोर्ट ने 2014 में  प्राथमिक जाँच करने के लिए तत्कालीन अतिरिक्त उपायुक्त जितेंद्र दहिया को आदेश दिए की सज्जन सिंह और उदयचंद की जाँच करके जाँच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाये। करीब पांच महीने बाद जाँच पूरी होने पर जब कोर्ट में पेश हुई तो माननीय जज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फरीदाबाद के तत्कालीन उपायुक्त समीरपाल सरों  को विभागीय जाँच के लिए आदेश जारी किये। तत्कालीन उपायुक्त ने कोर्ट के आदेशों पर कार्यवाही करते हुए दोनों के खिलाफ विभगीय जाँच शुरू करा दी गई।जिसकी अंतिम रिपोर्ट में जाँच अधिकारी ने दोनों कर्मचरियों को दोषी मानते हुए अपनी रिपोर्ट  जिला उपायुक्त को पेश की ।

रिपोर्ट के मुताबिक दोषियों ने निजी लाभ के लिए नियमों का किया उल्लंघन


इस रिपोर्ट के मुताबिक सज्जन सिंह ने तत्कालीन उपायुक्त प्रवीण कुमार को गुमराह कर अपने निजी लाभ के लिए उदयचंद को फरीदाबाद में मेवात जिले के डीसी रेट पर बतौर अकाउंटेंट रखा जोकि नियमो की विरुद्ध था। साथ ही गलत तरीके से  नियुक्ति पाने के बाद दोनों ने मिल कर बिल वाउचर के माध्यम से  लगभग पांच लाख रूपए का घोटाला किया और रिपोर्ट में जाँच अधिकारी ने साफ तौर पर लिखा है की सज्जन सिंह और उदयचंद ने मिल अपनी नियुक्ति और अधिकारों के बारे में गलत जानकरी देकर  कर फर्जी यात्रा भत्ते और अन्य लाभ उठाते रहे व् विभाग को लाखो  का नुकसान पहुंचते रहे।

पूरे मामले पर आरटीआई कार्यकर्ता राशिद खान का क्या कहना है


इस पूरे मामले में जब आरटीआई कार्यकर्त्ता राशिद खान से बात की गई तो उसने बताया की सज्जन सिंह के विरुद्ध आरटीआई से प्राप्त जानकरी के आधार पर ही  आज  से करीब तीन साल पहले 2014 में  लगभग 13 लाख के गबन का मामला प्रकाश में आया था। जो थाना सिविल लाइन्स में धोखधड़ी की धाराओं 420 व् 409 के तहत दर्ज है।  ये मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। इस पूरे मामले में प्रशाशन नौ दिन चले अढ़ाई कोस की कहावत को चरित्रार्थ करते दिख रहा है। जबकि जब से मामला चल रहा है।  पिछली सरकार भी भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने रुख को सबसे बेहतर बताती रही थी  और अब की मौजूदा सरकार भी भ्रष्टाचार को लेकर बहुत गंभीर होने का दावा कर रही है।  लेकिन जब आरटीआई से प्राप्त जानकरी में अधिकारी दोषी पाया गया, तब से लेकर याचिकाकर्ता  को कोर्ट मे जाना पड़ा हो तो कैसे सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ होने का दावा कर सकती है।  इन छ सालो में  दोनों आरोपी अधिकारी और कर्मचारी पर किसी भी सक्षम अधिकारी ने कोई कार्यवाही करना जरुरी नहीं समझा जबकि गुरुग्राम में इनमे से एक सज्जन सिंह पर भ्रष्टाचार और गबन का मामला भी दर्ज है। दोनों आरोपी अधिकारी और कर्मचारी  मौज लेते रहे जिनमे से बाल कल्याण अधिकारी सज्जन सिंह सेवानिवृत भी हो गये है और उदयचंद को नियमित भी कर दिया गया साथ ही इतने गंभीर आरोपों  बाद भी वह आज भी अपनी सीट पर हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस सब को देखते हुए लगता है कि भ्रष्टाचार और बेईमानी से मुक्त भारत देश बनाने का सपना सिर्फ सपना ही रह जाएगा ।

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