विश्व हृदय दिवस : सहज स्वास्थ्य भविष्य की मांग

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न्यूज़ एनसीआर, 29 सितंबर-फरीदाबाद | विश्व हृदय दिवस के उपलक्ष में एमवीएन विश्वविद्यालय के तत्वाधान में स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज ने सेक्टर 2 हुडा पार्क बल्लभगढ़ में सुबह 5:30 से 7:30 तक निःशुल्क सामाजिक परामर्श / जागरूकता शिविर का आयोजन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.(डॉ) जे.वी देसाई द्वारा मुख्य अतिथि बल्लभगढ़ विधायक मूलचंद शर्मा के भाई टीपर चंद्र शर्मा और परामर्शदाता डॉक्टर फिरोज खान को शॉल ओढ़ाकर किया। कार्यक्रम के अवसर पर कुलपति ने बताया कि हृदय हमारी भावनाओं को व्यवस्थित रखने के साथ-साथ शरीर को आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति बिना रुके रक्त संचार के द्वारा करता रहता है। खुद को बेहतर साबित करने का दबाव, एकाकी जीवन, दौड़ भाग व प्रतिस्पर्धा वाली जीवन शैली, खानपान की गलत आदतें हृदय पर अनावश्यक रूप से दबाव डालती हैं। इसके लिए एमवीएन ने जागरुकता शिविर का आयोजन किया है जिसके द्वारा सहज स्वास्थ्य की संकल्पना को साकार किया जा सकता है।
वहीं विभागाध्यक्ष तरुण विरमानी ने बताया हृदय रोग मुख्यतया तीन कारणों से होता है, पहली ब्लड प्रेशर, दूसरी कोलेस्ट्रॉल और तीसरी शुगर। किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर सिस्टोलिक/डायस्टोलिक रक्तचाप के रूप में बताया जाता है। यह दो प्रकार का होता है, निम्न रक्तचाप और उच्च रक्तचाप। निम्न रक्तचाप में ह्रदय, मस्तिष्क और गुर्दे जैसे महत्वपूर्ण अंगों में ऑक्सीजन व अन्य पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते हैं। उच्च रक्तचाप में ह्रदय रोग, गुर्दे की बीमारियां, धमनियों का सख्त होना, मस्तिष्क और आंखों में खराबी का जोखिम बढ़ जाता है। एक स्वस्थ व्यक्ति का रक्तचाप 120/80 मिलीमीटर होना चाहिए।
फार्मेसी विभाग की सहायक प्रोफेसर रेशु विरमानी ने बताया कोलेस्ट्रॉल शरीर के अंदर पाए जाने वाली वसा को पचाने में मदद करता है। यह रक्त में घुलनशील नहीं होता है। कोलेस्ट्रॉल मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं:एलडीएल, एचडीएल और वीएलडीएल। एलडीएल व वीएलडीएल कि अधिक मात्रा धमनियों की भीतरी दीवारों पर परत बनाने लगती है, जिससे थक्का जम कर धमनियों में रक्तसंचार में रुकावट डाल देता है और परिणाम स्वरूप हृदयाघात या स्ट्रोक हो सकता है।
सहायक प्रोफेसर विकास जोगपाल ने बताया इंसुलिन शरीर के अंदर भोजन को ऊर्जा में बदलने और शर्करा की मात्रा को विनियमित करता है। शुगर की बीमारी में रक्त शर्करा का स्तर बढ़ता जाता है और गंभीर व दीर्घकालिक जटिलताओं में हृदय रोग व स्ट्रोक की संभावनाएं बढ़ जाती है।
डॉक्टर फिरोज खान ने बताया कि 35 साल की उम्र पर ब्लड प्रेशर की जांच हर एक से दो महीने पर करवा लेनी चाहिए। कोलस्ट्रोल के मामले में 30 साल के बाद हर तीन साल में एक बार व 40 साल के बाद साल में एक बार लिपिड प्रोफाइल अवश्य कराएं। वहीं शुगर के मामले में 40 साल के बाद हर साल शुगर का की जांच करवाते रहें। अगर कहीं कुछ असामान्यताएं या अनियमितताएं है तो नियमित रूप से डॉक्टरी परामर्श करते रहें।
कार्यक्रम के अंत में ह्रदय रोगों से बचाव के उपायों पर भी चर्चा की गई और यह निष्कर्ष निकला की तनाव व नशा मुक्त जीवन, नमक का कम उपयोग, नियमित व्यायाम करना, ताजे और मौसमी सब्जियों-फलों का अधिकतम उपयोग, मल्टी ग्रेन और चौकर युक्त आटे की रोटी, दलिया, ओमेगा 3 वाले पदार्थ जैसे अखरोट, बादाम, फ्लेक्स सीड, नींबू, शहद, लहसुन का नियमित सेवन और जंक/फास्ट फूड से तौबा ही वह माध्यम है जिससे ह्रदय को सहज स्वास्थ्य रखा जा सकता है।
इस कार्यक्रम की कुलसचिव डॉ राजीव रतन और विभाग संकायाध्यक्ष डॉ ज्योति गुप्ता ने भूरी भूरी प्रशंसा की और कहा कि विभाग समय-समय पर समाज के बीच जाकर इस प्रकार के कार्यक्रम करता रहेगा और इस शिविर में आए सभी गणमान्य व्यक्तियों का अभिनंदन एवं आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर राजकुमार शर्मा, मंडल अध्यक्ष-बल्लभगढ़ युवा मोर्चा, वेद प्रकाश पाराशर-उपाध्यक्ष, सोनू सागर-मंडल महामंत्री, हृदयेश सिंह-मंडल सचिव, वीर चौधरी-आदर्श नगर मंडल, रवि सोनी-वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता के अथक परिश्रम और सहयोग से 223 लोगों ने कार्यक्रम में अपना परीक्षण कराया और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपना योगदान दिया।

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