इंदौर घराने के गायक नकुल मल्होत्रा ने अपने गायन से श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध

गीता मंदिर में हुआ शास्त्रीय संगीत का आयोजन

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न्यूज़ एनसीआर, (एकता रमन) 23 सितंबर-फरीदाबाद | 22 सितंबर 2018 को सैक्टर 15 स्थित गीता मंदिर के सभागार में सुरभारती कलाकेंद्र, फरीदाबाद तथा राष्ट्रीय संगीतज्ञ परिवार, दिल्ली द्वारा शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में शास्त्रीय संगीत के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम का प्रारंभ सुरभारती के शिष्यों द्वारा सरस्वती वंदना के गायन से हुआ जिसके बोल थे – “मेरे कंठ बसो महारानी”। इसके पश्चात इंदौर घराने के उभरते हुए गायक नकुल मल्होत्रा ने अपने प्रभावशाली गायन से सबका मन जीत लिया। इन्होंने राग पूरियाधानाश्री में विलंबित एवं छोटा ख्याल प्रस्तुत किया। नकुल ने चार वर्ष की आयु से ही संगीत में रुचि दिखाना आरंभ कर दिया था। जब उनके पिता प्रोफेसर भूपेन्द्र मल्होत्रा के पास शिष्य सीखने आते थे तो अपना स्कूल कार्य शीघ्रता से पूरा करके उनके पास बैठ जाते थे। आरंभ में रामजस डे बोर्डिंग, आनंद पर्वत, दिल्ली, तत्पश्चात बालभारती, गंगाराम मार्ग, दिल्ली से अपनी पढाई पूर्ण की। कक्षा तीसरी में अवार्ड आफ ऐक्सीलेंस मिला। बालभारती विद्यालय में कक्षा पांचवीं और बाहरवीं में वीणापाणि अवार्ड भी दिया गया। जब ग्यारहवीं में थे तब ओसका संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रथम आने पर युवा संगीत रत्न से सम्मानित किया गया। आपने संगीत की आरंभिक शिक्षा अपने पिता से ग्रहण की और आजकल इंदौर घराने के वरिष्ठ गायक पंडित बलदेव राज वर्मा से संगीत की विधिवत शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से म्यूज़िक ऑनर्स कर रहे हैं। कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रोताओं ने करतल ध्वनि से नकुल की प्रस्तुति को सराहा।
इसके पश्चात गया घराने के पखावज वादक गौरव शंकर उपाध्याय ने अपने पखावज वादन द्वारा समां बाँध दिया। इनके पखावज वादन में तैयारी व लयकारी पर इनकी पैंठ देखते ही बनती थी। रवि पाल का गायन भी अत्यंत प्रभावशाली रहा। इन्होंने राग पूरियाकल्याण से अपना गायन प्रारम्भ किया, जिसमे इन्होंने विलंबित एवं द्रुत ख्याल की प्रस्तुति दी। इन्होंने अपने गायन का समापन सुप्रसिद्ध ठुमरी – “याद पिया की आए” प्रस्तुत करके किया जो की अत्यंत शोभनीय रहा। पंडित अभिक सरकार का सरोद वादन सभा की अंतिम प्रस्तुति रही। पंडित अभिक सरकार पद्म विभूषण उस्ताद अमजद अली ख़ान के शिष्य हैं। इनके सरोद वादन ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन्होंने राग रागेश्वरी से प्रस्तुति प्रारम्भ की तथा भटियाली धुन के साथ अपने वादन को समाप्त किया।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरियाणा के सुप्रसिद्ध लोकगायक हरविंदर राणा रहे। इनके संगीत में योगदान के लिए इनको सुरभारती सम्मान दिया गया। इनके अतिरिक्त सितार की उच्चकोटि की प्राध्यापिका रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. सुभाष रानी चौधरी को आजीवन संगीत की सेवा करने के लिए सुरभारती सम्मान से सम्मानित किया गया। संगीत की जानी-मानी शिक्षिका डॉ. अंजू मुंजाल को भी उनके सांगीतिक योगदान के लिए सुरभारती सम्मान दिया गया। गीता मंदिर सैक्टर 15 के प्रधान आर.के. मल्होत्रा और भजन गायक श्याम कालरा को भी इस उपलक्ष्य पर सम्मानित किया गया। सभा के अंत में कार्यक्रम के आयोजक मनीष त्रिखा एवं पंडीत देवेंद्र वर्मा का धन्यवाद किया गया।

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