जानें क्या है राखी बांधने का सही समय : पढ़ें पूरी खबर

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न्यूज़ एनसीआर, 25 अगस्त-फरीदाबाद | इस बार भाई-बहन के प्रेम का प्रतिक रक्षाबंधन पर ग्रहण व भद्रा का योग नहीं बन रहा है। हथीन के पंडित जोगेन्द्र प्रसाद ने बताया कि 37 वर्ष बाद रक्षाबंधन पर्व पर भद्रा का साया नहीं पड रहा है। उन्होंने बताया कि भद्राकाल में राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। इस साल राखी की सबसे खास बात यह है कि भद्राकाल सूर्य उदय होने से पहले ही समाप्त हो जाएगा। उन्होंने बताया कि सावन पूर्णिमा 25 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 16 मिनट पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी और 26 अगस्त की सांय 5 बजकर 25 मीनट तक रहेगी। पंडित जोगेन्द्र प्रसाद के मुताबिक इस बार रक्षाबंधन पर धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा।

उन्होंने बताया कि राखी बांधने का शुभ मुहुर्त वैसे तो भाई की कलाई पर राखी बांधने का कोई भी समय अशुभ नहीं होता है, लेकिन शास्त्रों में हर शुभ काम के लिए एक शुभ मुहुर्त निर्धारित किया गया है। मान्यता है कि भाई की दीर्घायु और खुशियों की कामना एक शुभ मुहुर्त में की जाए तो सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि शुभ मुहुर्त 26 अगस्त को सुबह 5 बजकर 59 मिनट से दोपहर 3 बजकर 37 मिनट तक होगा। राहुकाल सांय 4 बजकर 30 मिनट से 6 बजे तक रहेगा। इस दौरान बहन अपने भाई को राखी नहीं बांध सकती। पंडित जोगेन्द्र प्रसाद ने बताया कि महाराज दशरथ के हाथों अपने माता पिता के साथ तीर्थ यात्रा कर रहे श्रवण कुमार की मृत्यु के प्रसंग से भी यह पर्व जुडा है। इसलिए इस दिन रक्षासूत्र सर्वप्रथम गणेश जी को बांधने के बाद श्रवण कुमार को ही अर्पण किया जाता है।

उन्होंने बताया कि, राखी दाहिनी कलाई पर ही बांधनी चाहिए। धर्म शास्त्रों के अनुसार 12 वर्ष तक चले देव-दानव युद्ध में देवराज इन्द्र जब दानवों से पराजीत होने लगे तब उनकी पत्नी इन्द्राणी ने रक्षासूत्र बांधकर उन्हें विजयी बनाया था। प्राचिन काल में ऋषि मुनियों के उपदेश की पूर्ण आहुति इसी दिन होती थी। वे अपने पास आए राजाओं के हाथों में रक्षासूत्र बांधकर उन्हें समस्त प्रजा की रक्षा करने का संकल्प कराते थे। इसी को ध्यान में रखकर बहुत से लोग आज भी अपने कुल ब्राहमणों से रक्षासूत्र बंधवाते हैं।

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