असाध्य रोगों की एक ही दवा है ‘योग’

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न्यूज़ एनसीआर, 18 अगस्त-फरीदाबाद | ऋषि मुनियों की देन योग के द्वारा असाध्य रोगों को भी समाप्त किया जा सकता है। रोगों का उदगम अधिकत मनुष्य के पेट से होता है और यह खान-पान में लापरवाही के वजह से भी बीमारियों को जन्म मिलता है। यह बात भारतीय योग संस्थान की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य वेदप्रकाश राठी ने सैक्टर-18 स्थित टयूबवैल वाले पार्क में साधकों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि मानव कल्याण के लिए भारतीय योग संस्थान शहर में 76 से अधिक कक्षाएं लगाकर लोगों को योग द्वारा स्वास्थ्य लाभ पहुंचा रही है। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि वे योग के लिए स्वयं के साथ-साथ औरों को भी जागरूक करें कि वह आज के तनावपूर्ण वातावरण में समस्त रोगों की एक ही अचूक दवा योग है। उन्होंने पेट के रोगों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि खान-पान की अनियमितिता तथा दिनचर्या के कारण आज लोग पेट की बीमारियों से ग्रस्त हैं। शारीरिक परिश्रम न होने के कारण लोग मोटापा जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिसमें जंक फूड जैसे व्यंजन बीमारियों को बढ़ावा दे रही है।

राठी ने कहा कि आज अधिकतर लोगों में जोडों के दर्द की समस्या दिखाई देती है, लेकिन योग और प्राणायाम के द्वारा तथा सूक्ष्म व्यायाम के द्वारा ही जोडों के दर्द को समूल नष्ट किया जा सकता है। इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक महेश चंद गुप्ता ने शहर से आए विभिन्न संस्थाओं के योग साधको का स्वागत करते हुए कहा कि योग की इस विधा को घर-घर तक पहुंचाने का संकल्प लेना चाहिए तभी हम अपने आपको सार्थक मान सकेंगे। संस्था की अध्यक्ष सरला चौधरी, अशोक गर्ग ने भी साधकों को संबोधित किया।

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