राष्ट्रीय इन्डियन मैडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर 28 जुलाई को ‘धिक्कार दिवस’

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न्यूज़ एनसीआर, 28 जुलाई-फरीदाबाद | नैशनल मैडिकल कमीशन बिल के विरोध में पूरे भारत वर्ष में सभी निजी चिकित्सा संस्थान सुबह 6 बजे से सायं 6 बजे तक बन्द रहेगे। राष्ट्रीय इन्डियन मैडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर 28 जुलाई को ‘धिक्कार दिवस’ घोषित किया गया है।

डॉक्टरों का कहना है कि नैशनल मैडिकल कमीशन बिल चिकित्सा सेवा प्रणाली के स्तर की गुणवत्ता को और नीचे धकेल देगा तथा इलाज के खर्च को बढ़ावा देने वाला साबित होगा। विभिन्न प्रकार की बेमेल चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों को ब्रिज कोर्स करने का प्रावधान, सभी पद्धतियों के लिए आत्मघाती हो सकता है। इस का स्वरूप न तो नैशनल है, न ही यह पूर्ण रूप से मैडिकल कहा जा सकता है। इसे कमीशन या आयोग कहना भी अनुचित होगा। आई एम ए के अनुरोध तथा सुझावों के विपरीत, भारत सरकार का यह कदम लड़खड़ाती चिकित्सा सेवा प्रणाली को सहारा देने के बजाय, मंहगा तथा निम्न स्तर का बना देगा।

भारत में अब तक मेडिकल शिक्षा, मेडिकल संस्थानों और डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन से संबंधित काम मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया (MCI) की ज़िम्मेदारी थी। अगर ये विधेयक पारित होता है तो मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया खत्म हो जाएगी और उसकी जगह लेगा नेशनल मेडिकल कमीशन. तब देश में मेडिकल शिक्षा और मेडिकल सेवाओं से संबंधित सभी नीतियां बनाने की कमान इस कमीशन के हाथ होगी।

मेडिकल कमीशन बिल की 7 ज़रूरी बातें


  • मेडिकल एडवाइज़री काउंसिल – केंद्र सरकार एक काउंसिल बनाएगी जो मेडिकल शिक्षा और ट्रेनिंग के बारे में राज्यों को अपनी समस्याएं और सुझाव रखने का मौका देगी. ये काउंसिल मेडिकल कमीशन को सुझाव देगी कि मेडिकल शिक्षा को कैसे सुलभ बनाया जाए।
  • दाख़िले के लिए एक परीक्षा – इस कानून के आते ही पूरे भारत के मेडिकल संस्थानों में दाख़िले के लिए सिर्फ एक परीक्षा ली जाएगी. इस परीक्षा का नाम NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट) रखा गया है।
  • मेडिकल प्रैक्टिस के लिए एक परीक्षा – ग्रेजुएशन के बाद डॉक्टरों को एक परीक्षा देनी होगी और उसके बाद ही मेडिकल प्रेक्टिस का लाइसेंस मिल सकेगा. इसी परीक्षा के आधार पर पोस्टग्रेजुएशन के लिए दाखिला होगा।
  • मेडिकल संस्थानों की फीस – ये कमीशन निजी मेडिकल संस्थानों की फीस भी तय करेगा लेकिन सिर्फ 40 फीसदी सीटों पर ही. 60 फीसदी सीटों पर निजी संस्थान खुद फीस तय कर सकते हैं।
  • ‘ब्रिज कोर्स’ – बिल का क्लॉज़ 49 कहता है कि एक ब्रिज कोर्स लाया जाएगा जिसे करके आयुर्वेद, होम्योपेथी के डॉक्टर भी एलोपेथी इलाज कर पाएंगे।
  • क्या होगा कर्मचारियों का – बिल का क्लॉज़ 58 कहता है कि इस कानून के आते ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया खत्म हो जाएगा और इसके अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त हो जाएंगी. उन्हें 3 महीने की तनख्वाह और भत्ते मिलेंगे।
  • नियुक्ति – मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया के अधिकारियों की नियुक्ति चुनाव से होती थी लेकिन मेडिकल कमीशन में सरकार द्वारा गठित एक कमेटी अधिकारियों को मनोनीत करेगी।

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