मृत्युंजय नाटक के जरिये जाति व्यवस्था पर किया सवाल

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न्यूज़ एनसीआर, 14 जून-फरीदाबाद | सेक्टर 12 कनवेंशन सेंटर में दूसरे दिन जब मृत्युंजय नाटक का मंचन शुरू तो दर्शक टकटकी लगाए बैठ गए। नाटक काफी गंभीर विषय पर था जिसे देख कर लोगों ने काफी सराहना की। जाति और वर्ण व्यवस्था पर करारा कटाक्ष करने वाले इस नाटक का निर्देशन इश्वर शून्य ने किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में एफआईए के मैंबर व कला प्रेमी बीबी महेंद्र मुख्य रूप से मौजूद थे। उन्होंने मृत्युंजय नाटक के अलावा फेस्टिवल की भी सराहना की।

तीसरा संभार्य थियेटर फेस्टिवल संभार्य फाउंडेशन और फरीदाबाद इंडस्ट्री असोसिएशन की तरफ से कराया जा रहा है। दूसरे दिन सांझा सपना ग्रुप द्वारा मृत्युंजय नाटक का मंचन किया गया। मराठी लेखक शिवाजी सावंत के उपन्यास मृत्युंजय को नाट्य रूप में रूपांतरण और निर्देशित करने का काम इश्वर शून्य ने किया है। इस नाटक के माध्यम से निर्देशक ने जाति और वर्ण व्यवस्था पर सवाल उठाया है। नाटक की कहानी महाभारत के पात्र कर्ण के इर्द गिर्द घूमती है। कहानी बताती है कि किस तरह से आज के युग में जाति व्यवस्था समाज पर हावी है।

नाटक के माध्यम से बताया गया कि हमारे यहां भाग्य और भगवान के सहारे बहुत कुछ दबा छुपा दिया जाता है, जबकि कर्ण के साथ जो भी हुआ उसमें वर्ण व्यवस्था का बहुत बड़ा हाथ था। उसकी ट्रेजेडी ये है कि वो एक छोटी जाति का है और शस्त्र विद्या सीखना चाहता है एकलव्य की तरह। शिवाजी सावंत द्वारा लिखा मृत्युंजय नाटक एक अत्यंत विचारोत्तेजक और बेचैन कर देने वाली प्रस्तुति है, जिसमें देश में आज भी दलितों, आदिवासियों एवं स्त्रियों के होने वाले संगठित उत्पीड़न की तस्वीर दिखाई पड़ती है। समाज में स्वर्ण और संपन्न वर्ग का पाखंड और फरेब साफ दिखाई पड़ता है कि किस प्रकार वे अपने स्वार्थ के लिए हाशिये के समाजों का इस्तेमाल कर लेते हैं और उन्हें उन्हीं जीवन स्थितियों में बनाये रखने के सारे यत्न करते हैं।

नाटक में सभी कलाकारों ने अपने कला का प्रदर्शन किया जिसे लोगों ने सराहा। नाटक में मुख्य रूप से विनय तनेजा, मोहित राज, हेमंत राय, अभिजीत सिंह, प्रज्ञा रावत, आशीष मोदी, साक्षी मिश्रा, अमन कुमार, रजत वर्मा, अपेक्षा वर्मा, हर्ष व अनस खान ने अहम भूमिका निभाई। इस मौके पर बीजेपी की रेनू भाटिया व संस्कार भारती के अभिषेक गुप्ता मोजूद थे।

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