न्याय व कानून कब-तक ताकतवर का गुलाम बनकर रहेगा ?

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न्यूज़ एनसीआर, 23 अप्रैल-फरीदाबाद | हरियाणा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड वर्करज यूनियन ने बेटियों के साथ हो रहे अत्याचार व आये दिन प्रदेश में बलात्कार की घटनाओं की रोकथाम के लिये कड़े कानून बनाये जाने के प्रावधान पर सरकार से सवाल खड़ा किया और कहा कि आज सचमुच में यह घोर कलयुग की विडम्बना है जो बच्चीयों, बेटियों के साथ अप्रिय घटनायें सहित हत्या मामले ने देश को झकजोर दिया है लेकिन सरकारों को इससे शायद कोई फर्क नही पड़ता व देश मे हुई इन दो घटनाओं ने काफी महत्वपूर्ण सवालों को जन्म दिया है, जिसका हल खोजना बुद्धिजीवी समाज को व सरकार को अति आवश्यक है। आखिर कब तक ऐसे मामलों को जातिगत व धर्म का रंग देकर आरोपियों को घिनोने जुर्म से बचाया जाता रहेगा?

बच्चियों व महिलाओं के साथ ये बर्बरता व उत्पीडनता की घटनायें आखिर कब बन्द होंगी ? उन्हें कब न्याय मिलेगा ? कब तक न्याय व कानून ताकतवर का गुलाम बनकर रहेगा ? कब तक गरीब व मजदूर वर्ग को मारते रहेंगे ? देश की सरकार सत्ता में आने से पूर्व चुनाव के समय में बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का नारा दिया करते थे, महिला के सम्मान में भाजपा मैदान में-लेकिन आज इन नारों के अर्थ ही बदल गया है। बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ- जो कि एक आज जुमला मात्र बनकर रह गया है। आज सरकारी व गैर सरकारी गाड़ियों पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ लिखवा कर जुमलाओं की लड़ी मात्र बनकर अखबारों व कागजों तक सिमट कर सीमित रही है लगातार इतनी अप्रिय घटनायें हो जाने बाद भी धरातल पर इसका कोई अर्थ नही रह जाता व सत्तासीन पार्टी वोट बैंक बनाने के लिये ही है वह सशक्त नही हैं सिर्फ नारों वाली सरकार बातें तो बड़ी-बड़ी करती है पर इस ओर अमल नही करती और महात्मा गाँधी का अनुसरण करने की बात कहकर अपनी राजनीति चमकाती है। बेटी आखिर बेटी होती है वह किसी गरीब, मजदूर, किसान या आम रोजीरोटी गुजर बसर करने वाले की हो या कर्मचारी की हो, आखिर कर्मचारी भी आमजन नागरिकों की भान्ति उनमें से ही एक है व उनकी पीड़ा भी सभी के समान है।

आज समस्त प्रदेश की तरह फरीदाबाद में भी ऐसी कई रेप के मामले देखने को मिले हैं जिनका मुख से शब्द बयाँ करना व सुनना निन्दनीय है। बच्चियों व महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार गम्भीर नही है जिसके लिये सरकार कोई कड़ा कानून गम्भीरता से लागू कर इसके लिये अलग से फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करे व जल्दी से जल्द मजबूत कानून लाये जिसके चलते कर्मचारी यूनियन संगठन एचएसईबी वर्कर्स व कर्मचारियों में भारी विरोधाभास है आखिर उनके भी परिवार, बेटे, बेटियाँ भी स्कूल, कॉलेजों व संस्थानों में पढ़ने जाते हैं उनके साथ भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है। भविष्य में सरकार को संज्ञान लेकर सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता करने चाहियें व कड़े कानून का प्रावधान पारित कर विधेयक लाया जाना चाहिये।

इस निन्दनीय शोक प्रकट के अवसर पर प्रधान लेखराज चौधरी, जगदीश, बीरसिंह रावत, सुनील कुमार, बलबीर कटारिया, राजबीर सिंह, जिनेश जुनेजा, वीरसिंह, रामकुमार, श्रवण कुमार, नवीन, योगेश, मनोज, चन्दरमोहन, प्रेमचन्द, विजय, हुकुमसिंह राणा, उमेश आदि मीटिंग में मौजूद रहे।

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