डिलाइट व्यू के निर्माण कार्य को एक और बड़ा झटका, पीसीबी ने एनओसी रद्द की

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न्यूज़ एनसीआर, 13 अप्रैल-फरीदाबाद | सुप्रीम कोर्ट का प्रतिबंध होने के बावजूद सूरजकुंड रोड पर अफसरों की मिलीभगत से चल रहे मैसर्स डिलाइट व्यू के निर्माण कार्य को अबकी बार बड़ा झटका लगा है। प्रशासनिक स्तर पर इसका निर्माण कार्य पहले ही रुकवा दिया गया था लेकिन नया मोड यह है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी ) ने एनओसी (कंसेंट) को रद्द कर दिया है।

गुरुवार को इस मामले में एनजीटी में सुनवाई भी थी। पीसीबी द्वारा दी गई एनओसी रद्द कर दिए जाने का हवाला देते हुए एडवोकेट जनरल ने दलील दी कि चूंकि निर्माण कार्य की अनुमति ही वापस ले ली है तो वाद चलाए रखने का औचित्य नहीं है। नतीजतन एनजीटी ने विचाराधीन केस डिसमिस कर दिया है। यह केस आरटीआई एक्टिविस्ट वरुण श्योकंद ने दायर किया था।

डिलाइट होटल ग्रुप की मालकिन राजरानी भाटिया की अनखीर गांव के रकबे में सवा दो एकड़ जमीन है। यह जमीन जिमखाना क्लब के निकट सूरजकुंड रोड पर है। पॉश लोकेशन की वजह से भाटिया करीब एक साल से यहां फाइव स्टार मैसर्स डिलाइट व्यू का निर्माण करने में लगे हुए थे। आरटीआई एक्टिविस्ट वरूण श्योकंद का आरोप था कि इस होटल के लिए संबंधित विभागों से एनओसी नहीं ली गई थी लेकिन राजरानी के पुत्र बंटी ने दावा किया था कि उन्होंने निर्माण कार्य शुरू करने से पहले करीब 22 विभागों से एनओसी ली थी।

एनजीटी में केस दायर करने के लिए वक्त वरूण श्योकंद ने एनसीजेड (नेशनल कंजरवेटिव जोन) के नियमों का उल्लघंन किए जाने का ग्राउंड लिया था। करीब 40 फुट गहराई तक खनन हुआ। करीब चार करोड़ रुपए का पत्थर खनन किया जा चुका है। एनजीटी में दावा किया था कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण विभाग से कोई एनओसी नहीं ली गई थी। निर्माण को पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम-1900 की धारा 4 और 5 का उल्लघंन भी बताया था। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के आदेश-2002 का उल्लघंन करके वन और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की बात कही गई थी।

19 मार्च को नगर निगम कमिश्नर ने सूरजकुंड रोड पर 5 फार्म हाउस संचालकों को सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) के लिए एलओआई (सशर्त अनुमति पत्र) को रद कर दिया था। इसी मामले में नगर निगम के सीनियर टाउन प्लानर सतीश पाराशर का निलंबन भी किया जा चुका है। इस मामले को कांग्रेसी विधायक ललित नागर ने विधानसभा के बजट सत्र में सीएम के समक्ष उठाया था। तब पूरी विधानसभा में सरकार की खूब किरकिरी हुई। सीएम ने मामले की जांच कराई, तभी यह गड़बड़ी सामने आई।

पीसीबी ने जिन नियमों की पालना के साथ निर्माणकर्ता को एनओसी जारी किया था, वे उन नियमों की पालना में खरे नहीं उतरे। पीसीबी की टीम ने मौका मुआयना किया था। इसके बाद बोर्ड की बैठक हुई। बोर्ड ने चर्चा के बाद अनुमति रद्द की है।

अनिल ग्रोवर, एडवोकेट जनरल, हरियाणा सरकार


एनजीटी ने केस तो डिसमिस कर दिया है। मेरा सवाल तो पीसीबी से है। उन्होंने पहले एनओसी किस आधार पर दी थी और किस आधार पर वह रद्द कर दी है। मैं इसमें आगे की कानूनी कार्रवाई करूंगा। मैं नियम विरुद्ध कोई काम नहीं कर रहा हूं। हमने निर्माण से पहले ही एनओसी ले ली थी।
बंटी भाटिया, मैसर्स डिलाइट व्यू के मालिक।

उच्च स्तरीय जांच में फंसेगा वन विभाग


दरअसल, वन विभाग ने कुछ बड़े भूमाफियाओं से मोटी रकम लेकर पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम-1900 की धारा 4 और 5 का मखौल उड़ाया है। पायनियर ने जब इस खेल की तह तक जाने की कोशिश की तो पता चला कि शुरुआती खेल वन विभाग से ही शुरू हुआ। वन विभाग और चकबंदी अधिकारियों ने कुछ बड़े भूमाफियाओं की जमीन वर्ष 2013-2014 के समय हुई चकबंदी और पैमाइश में फायदा पहुंचाया। जिस जमीन पर होटल का निर्माण कार्य चल रहा है, दरअसल वह वर्ष 2013-2014 से पहले पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम-1900 की धारा 4 और 5 के अंतर्गत आती थी।

लेकिन वर्ष 2014 के बाद सांठगांठ से यह जमीन सेक्शन 4 और 5 से बाहर निकाल दी गई। अर्थात जमीन को प्रतिबंधित वन क्षेत्र से बाहर निकाला गया। आरटीआई एक्टिविस्ट समेत कई अन्य लोग अब इस मामले में कूद रहे हैं। इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठने लगी है। ऐसे में यदि उच्च स्तरीय जांच हुई तो वन विभाग, चकबंदी विभाग के अधिकारी जरूर फंसेंगे।

जरा इस पर भी गौर करें


अवैध बोरिंग के मामले आए दिन पुलिस थाने में दर्ज किए जा रहे हैं।
बीजेपी नेता गजेंद्र भड़ाना व इनके भाई पर अवैध निर्माण का केस दर्ज हो चुका है।
पहाड़ के अंदर पेड काटने के कई मामले सूरजकुंड थाने में दर्ज हैं।
पहाड़ से सटे हुए गांव के लोग जमीन पर मालिकाना हक जताते हुए अवैध निर्माण करने में लगे हैं।
खोरी गांव में नगर निगम की करीब 100 एकड़ जमीन को भूमाफियाओं ने अपना बताकर बेच दिया।

एनजीटी ने वाद में जारी किए थे ये नोटिस


केंद्र सरकार
हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव
हरियाणा वन विभाग
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
नगर निगम
डीसी
हरियाणा खनन विभाग
केंद्रीय भूजल प्राधिकरण
निर्माणाधीन भवन की मालकिन राजकुमारी भाटिया

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