गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा ‘संस्कार भारती सदन’ का शिलान्यास

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न्यूज़ एनसीआर, 24 नवंबर-दिल्ली | “मैं कलाकार तो नहीं परंतु कला प्रेमी हूँ”। ये शब्द हैं माननीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह के जब वह पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में ‘संस्कार भारती सदन’ के शिलान्यास में सम्मिलित हुए।

ललित कलाओं को बढ़ावा देने एवं नवोदित कलाकारों को मंच प्रदान करने वाली अखिल भारतीय संस्था, संस्कार भारती के नई दिल्ली स्थित कार्यालय के नव निर्माण का कार्य आज हवन और शिलान्यास से प्रारम्भ हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित माननीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा – “भारत में इस प्रकार कलाकारों को मंच एवं संस्कार देने के कार्य में लगी संस्कार भारती सर्वोपरि है।” उन्होंने यह भी कहा के देश में किसी भी प्रकार के सामाजिक परिवर्तन में कला और साहित्य का विशेष योगदान रहा है जिनके उत्तम उदाहरण बंकिम चंद्र द्वारा रचित आनंद मठ का ‘वंदे मातरम’ और अबनींद्रनाथ टैगोर द्वारा बनाया गया भारत माता का अद्भुत चित्र हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मभूषण विदुषी डॉ. सरोजा वैद्यनाथन ने की और संस्कार भारती के संस्थापक एवं संरक्षक श्री योगेन्द्र श्रीवास्तव ‘बाबा’ का आशीर्वाद भी रहा।

संस्कार भारती को शुभकामनाएं देने भारतीय जनता पार्टी दिल्ली अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी, पूर्व उपाध्यक्ष एवं जाने माने रंगकर्मी श्री दया प्रकाश सिन्हा, नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट के डीजी अद्वैत गणनायक, प्रसिद्ध ध्रुपद गायक उस्ताद वसीफ्फुद्दीन डागर, प्रसिद्ध नृत्यांगना जोड़ी नलिनी कमलिनी, रंगकर्मी श्री जे पी सिंह, संस्कार भारती राष्ट्रीय अध्यक्ष वासुदेव कामथ एवं अन्य कई गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

संस्कार भारती के संस्थापक एवं संरक्षक बाबा योगेन्द्र जी ने कहा – “जब भी भारत वर्ष में भारी संख्या में साधु, कलाकार और कला भक्त एकत्रित होंगे तब निश्चित रूप से देश की पंक्ति और बढ़ेगी, नए कलाकार जुड़ेंगे। कलाकारों के एकत्रीकरण से एक नई दिशा मिलेगी, नई ऊर्जा उत्पन्न होगी और अपनी ही जागृत शक्ति के बल पर देश का भाग्य अवश्य बदलेगा।

कार्यक्रम के संचालक दिल्ली प्रांताध्यक्ष श्री राजेश चेतन ने सभी का धन्यवाद किया और विशेष रूप से दिल्ली नगर निगम का जिनका निरंतर सहयोग मिलता रहा है और आगे भी मिलता रहेगा। इस परियोजना के अध्यक्ष श्री सुरेश बिंदल ने जानकरी दी के कार्यालय चार मंज़िला होगा और इस में सांस्कृतिक कार्यक्रम, कार्यशालाएं, पुस्तकालय और विभिन्न प्रकार के शोधकर्ताओं के लिए प्रयोगशालाएं भी होंगी। निर्माण कार्य 15 महीनों में पूरा हो सके ऐसा प्रयास रहेगा।

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