मानव रचना को इनोवेशन व एंटरप्रय्नोरशिप को बढ़ावा देने के लिए मिला 2.67 करोड़ का अनुदान

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न्यूज़ एनसीआर, 15 नवंबर-फरीदाबाद | हमेशा से स्टूडेंट्स को कुछ नया करने की सोच के साथ प्रोत्साहित करने वाले मानव रचना शिक्षण संस्थान ने इस दिशा में एक और मील का पत्थर स्थापित किया है। नैशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी एंड एंटरप्रय्नोरशिप डिवेलपमेंट, इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (ईडीआईआई) नैशनल साइंड एंड टेक्नोलॉजी एंटरप्रय्नोरशिप डिवेलपमेंट बोर्ड, डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी भारत सरकार के तहत युवाओं को अपने स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करने में जुटा है। इसी के तहत मानव रचना इंटरनैशनल यूनिवर्सिटी को 2.67 करोड़ का अनुदान प्राप्त हुआ है। इस अनुदान का प्रयोग स्टूडेंट्स में रिसर्च, इनोवेशन व एंटरप्रय्नोरशिप को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा।

न्यू जैनरेशन इनोवेशन एंड एंटरप्रय्नोरशिप डिवेलपमेंट सेंटर स्थापित करने की सोच ईडीआईआई की थी। ईडीआईआई आटोनोमस व नोन प्रोफिट इंस्टीट्यूट है जो कि एपैक्स फाइनैनशियल इंस्टीट्यूट जैसे आईडीबीआई बैक, आईसीआईसीआई बैक, स्टेट बैक आफ इंडिया व आईएफसीआई लिमिटेड आदि से स्पान्सर है। केवल यहीं नहीं यह विभिन्न गर्वंमेंट मिनिस्ट्रीस व डिपार्टमेंट ऑफ साइस एंड टेक्नोलाजी से भी सहयोग प्राप्त है। एमआरआरआईआईसी ने अगले 5 सालों में 100 स्टार्टअप को फंड करने की योजना तैयार की है यह जानकारी सीएस (डॉ.) मोनिका गोयल ने दी।

डॉ. मोनिका गोयल मानव रचना के बिजनेस इंक्युबेशन इनीशिएटिव को लीड करती है। यह सेंटर स्टूडेंट्स को आईडिया जेनरेशन, फाइनैंनसिंग, प्रोटोटाइप डिवेलपमेंट, रैगुलेटरी एप्रूवल, मार्केटिंग प्लान आदि हर तरह के चरण में सहायता करता है। इस प्रोसैस के बाद बोर्ड ऑफ एक्सपर्ट के द्वारा एप्रूव किए गए प्रोजेक्ट के 2.5 लाख की राशि प्रदान का जाएगी और इन्हें 18 महीने का समय दिया जाएगा। केवल यहीं नहीं एमआरआरआईआईसी बैंकर्स व वैंचर कैपिटल फर्म के साथ एमओयू के माध्मय से संबंद्ध स्थापित करने का भी विचार कर रहा है। डॉ. मोनिका गोयल ने बताया कि हम इंजीनियरिंग ही नहीं नॉन इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स को भी इस पहले के तहत प्रोत्साहित कर रहे हैं कि वह अपनी अलग सोच को एक सफल एंटरप्राइज में बदल सके।

इस बारे में जानकारी देते हुए मानव रचना शिक्षण संस्थान के प्रेसिडेंट डॉ. प्रशांत भल्ला ने कहा कि मानव रचना में इंट्लैक्चुअलर प्रोपर्टी प्रोटैक्शन की पॉलिसी है ताकि इनोवेटर अपनी रचनात्मक काम को पेटैंट प्रोडक्ट के रूप में बदल सके। स्टूडेंट्स को न केवल जरूरी सुविधा व मैंटर का सहयोग दिया जाता है बल्कि अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन करके उनकी अलग सोच का प्रदर्शन करने का भी माध्यम प्रदान किया जाता है। जो कि इंडस्ट्री पार्टनर के सहयोग से चलाए जाते हैं ताकि स्टूडेंट्स को उद्योग जगत की मांग के अनुसार तैयार किया जा सके।

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