विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान को दिया करारा जवाब

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न्यूज़ एनसीआर, 24 सितम्बर-दिल्ली | विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए आज कहा कि हैवानियत की हदें पार करने वाला देश भारत को इंसानियत और मानवाधिकार का पाठ पढ़ा रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें अधिवेशन को संबोधित करते हुए स्वराज ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने अपने संबोधन में भारत पर तरह-तरह के निराधार आरोप लगाए हैं। पाकिस्तान के सियासतदानों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि दोनों देशों ने साथ-साथ आजादी हासिल की लेकिन भारत ने पूरे विश्व में सूचना -प्रौद्योगिकी हब के रूप मे अपनी पहचान बनाई जबकि पाकिस्तान की पहचान एक दहशतगर्द मुल्क के रूप में है।

  • पाकिस्तान ने आतंकवादी संगठन और उनके ठिकाने बनाए जबकि भारत ने विशिष्ट शैक्षणिक संस्थाएं बनायीं।
  • हमने आईआईटी, आईआईएम, एम्स जैसे संस्थान बनाए जबकि पाकिस्तान ने लश्करे-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन और हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकवादी संगठन बनाए।
  • हमने स्कॉलर, डॉक्टर, वैज्ञानिक और इंजीनियर बनाए जबकि पाकिस्तान ने दहशतगर्द और जेहादी पैदा किए।
    भारत ने पाकिस्तान की आतंकवाद की चुनौतियों को घरेलू विकास के रास्ते बाधक नहीं बनने दिया।
  • हैवानियत की हदें पार करने वाला पाकिस्तान हमें इंसानियत सिखा रहा है
  • सभी देश आतंकवाद की निंदा तो करते हैं लेकिन कार्रवाई के लिए एकजुट नहीं होते
  • पाकिस्तान को नसीहत-जो पैसा आतंकवाद पर खर्च कर रहे हो उसे मुल्क के आवाम के लिए खर्च करो
  • हम गरीबी से लड़ रहे हैं, पाक हमसे लड़ रहा है
  • पाकिस्तान ने इंसानियत का मुद्दा उठाने का नाटक किया, जबकि यही वह देश है जो इंसानियत का खून बहा रहा है।
  • भारत आंतकवाद का सबसे पुराना शिकार रहा है. आतंकवाद चारों ओर पैर पसार रहा है, हमें मिलकर इसके खात्मे के बारे में सोचना होगा।
  • पाकिस्तान पर हमला बोलते हुए कहा- भारत ने आईटी, आईआईएम, इसरो, एम्स जैसे विश्व प्रसिद्ध संस्थान बनाए, जबकि  पाकिस्तान ने जैश, हक्कानी जैसे आतंकवादी संगठन बनाए
  • पाकिस्तान ने कभी सोचा है कि भारत-पाकिस्तान साथ-साथ आजाद हुए थे, लेकिन आज भारत की पहचान आईटी सुपर हब के तौर पर है, जबकि पाक की पहचान आतंकवाद के सरगना के रूप में होती है।
  • चीन पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ देश अपने हितों के लिए आतंकवाद को पाल रहे हैं। यूएन जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद की निंदा करना रस्म सा बन गया है पर कितने देश इसे गंभीरता से ले रहे हैं। आतंकवाद की एक ही परिभाषा होनी चाहिए। मेरे-तेरे आतंकवाद की दृष्टि अलग न हो।

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