17 जुलाई से 11 अगस्‍त तक चला संसद का मानसून सत्र

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न्यूज़ एनसीआर, फरीदाबाद। इस बार का मानसून सत्र बहुत दिलचस्प और गतिविधियों से भरा रहा। लगभग तीन सप्ताह तक चले इस सत्र में भारत को नए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू मिले। कई हंगामों के बीच 14 बिल पास किए गए और किसानों की ख़राब हालत, कश्‍मीर मुद्दा, चीन पर चर्चा के अलावा नये रोज़गार पैदा करने की असमर्थता, घटते जीडीपी की विकास दर जैसे विषय भी गरमाये रहे। इसके अलावा करेंसी नोटों और राहुल गांधी पर गुजरात में पथराव के मामले पर भी हंगामा हुआ। सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन सभी सांसदों, जो संसद से नदारद रहते हैं, पर नकेल कस्ते हुए कहा के उन पर 2019 में कड़ी नज़र रखी जाएगी ।

पक्ष विपक्ष के बीच आरोपों और प्रत्‍यारोपों का दौर जारी रहा। हाल ही में गुजरात दौरे के दौरान राहुल गांधी की गाड़ी पर पथराव मुद्दे पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल पर सुरक्षा नियमों के उल्‍लंघन का आरोप लगाया। वहीं विपक्ष ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू को लेकर दिए बयान पर उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस दे दिया। कर्नाटक में आयकर विभाग की ओर से छापेमारी पर कांग्रेस ने जमकर विरोध जताया जिसके लिए वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने सफाई भी दी कि रिसॉर्ट पर रेड नहीं पड़ी।

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने गुस्‍सा ज़ाहिर करते हुए अपना इस्तीफा राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी को सौंप दिया। मायावती ने अपने इस्तीफे में कहा – “मैं शोषितों, मजदूरों, किसानों और खासकर दलितों के उत्पीड़न की बात सदन में रखना चाहती थी। सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में जो दलित उत्पीड़न हुआ है, मैं उसकी बात उठाना चाहती थी। लेकिन सत्ता पक्ष के सभी लोग एक साथ खड़े हो गए और मुझे बोलने का मौका नहीं दिया गया।” बसपा प्रमुख ने कहा “मैं दलित समाज से आती हूं और जब मैं अपने समाज की बात नहीं रख सकती हूं तो मेरे यहां होने का क्या लाभ है।”

मुलायम सिंह यादव ने सदन में महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि इसे खत्म करने की शुरुआत हमें अपने घर से करनी होगी। राज्यसभा में पूर्व क्रिकेटर से सांसद बने सचिन तेंदुलकर और अभिनेत्री रेखा की अनुपस्थिति पर सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने उनसे इस्‍तीफे की मांग कर डाली।

18 दिन का था मानसून सत्र

संसद का मानसून सत्र 17 जुलाई से 11 अगस्त तक चला। जिसमें से यदि साप्ताहिक छुट्टियां और राष्ट्रीय अवकाशों को निकाल दें तो सत्र 18 दिन का ही रहा। आंकड़ों के मुताबिक, संसद सत्र में एक मिनट में 29000 रुपये का खर्च आता है। संसद के उच्च सदन यानि राज्यसभा में पांच घंटे और निम्न सदन यानि लोकसभा में छह घंटे काम होता है यानि एक दिन में 11 घंटे। इस हिसाब से संसद की एक दिन की कार्यवाही में यानि एक दिन का खर्च 1,91,40,000 आता है तो 18 दिनों के सत्र में 34,45,20,000 के खर्च का अनुमान लगाया जा सकता है।

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