संसद के सेंट्रल हॉल में हुई मुलाकात पर हरियाणा की राजनीति में मचा घमासान

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न्यूज़ एनसीआर,दिल्ली। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा अौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसद के सेंट्रल हॉल में हुई मुलाकात पर हरियाणा की राजनीति में घमासान सा मच गया है। विधायक जयतीर्थ दहिया ने अपने निवास स्थान पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुड्डा और पी.एम. मोदी की मुलाकात पर कहा कि भाजपा हाईकमान लंबे समय से कद्दावर जाट नेताओं की लगातार तलाश कर रही है, जिसके चलते दोनों की मुलाकात के कई राजनीतिक मायने हैं। राजनीति में कभी भी कुछ भी सम्भव है। उन्होंने कहा कि हम संगठन की मजबूती चाहते हैं लेकिन कई बार आलाकमान से बात करने पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष को नहीं बदला गया। जिस तरह से पार्टी हमारे साथ व्यवहार कर रही है, मैं कांग्रेस से टिकट भी नहीं मांगूगा लेकिन उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया। दहिया ने कहा कि राजनीति में कुछ भी हो सकता है लेकिन जहां हुड्डा साहब जाएंगे पूरा विधायक दल उनके साथ जाएंगे।

दहिया ने कहा कि जब 2 दलों के वरिष्ठ नेता कहीं भी मिलते हैं, तो निश्चित तौर पर उनके बीच राजनीतिक चर्चा होती ही है। दोनों नेताओं ने एकांत में क्या बातचीत की, यह तो वही बता सकते हैं लेकिन यह तय है कि यह शिष्टाचार भेंटवार्ता भर नहीं थी। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों कांग्रेस के सारे विधायक बारी-बारी पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी तथा प्रदेश प्रभारी कमलनाथ से मिले थे। इसमें कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर को हटाने की बात वह रख चुके हैं। इसके बाद हुड्डा से भी पार्टी नेता राहुल गांधी ने बातचीत की थी। इसमें बातचीत में साफ हो गया था कि प्रदेश में संगठन में परिवर्तन किया जा रहा है लेकिन इसके बावजूद परिवर्तन नहीं किया गया।

इस बयान से मानो प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में गर्मी आ गई। बयान की चर्चा देखते ही देखते हरियाणा के राजनीतिक गलियारों से दिल्ली दरबार तक पहुंच गई। कारण साफ है कि कुछ दिन पूर्व बिहार में महागठबंधन की गांठ ऐसी खुली कि वहां के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही ‘भगवा’ हो गए तो ऐसे में प्रदेश के राजनीतिक लिहाज से भी इस मुलाकात को किसी स्तर की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। सूत्रों के अनुसार यदि समय रहते कांग्रेस हाईकमान ने पार्टी के हरियाणा से संबंधित अधिकतर विधायकों व सांसदों की भावनाओं के अनुरूप कोई फैसला शीघ्र नहीं किया तो हरियाणा की इस राजनीति के ऊंट के आने वाले समय में किसी भी करवट बैठने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। बहरहाल, प्रधानमंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री की इस मुलाकात ने प्रदेश की सियासत में एक नई कहानी को जन्म जरूर दे दिया है।

हुड्डा व तंवर में चल रही कश्मकश


उल्लेखनीय है कि पिछले काफी समय से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर के बीच कश्मकश चल रही है और हुड्डा खेमा जहां तंवर को अध्यक्ष पद से हटाने की मांग कर रहा है तो वहीं अशोक तंवर समर्थक भी हुड्डा खेमे पर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तौर से कोई भी हमला करने से नहीं चूक रहे। इस बीच मोदी व हुड्डा की मुलाकात राजनीतिक गलियारों में काफी अहम मानी जा रही है और हुड्डा समर्थक विधायक जयतीर्थ दहिया ने अपने बयान में यहां तक भी कहा है कि कांग्रेस हाईकमान प्रदेश के कांग्रेस विधायकों की भावनाओं को भी समझने का प्रयास नहीं कर रहा। शायद इन्हीं कारणों से नए समीकरणों का जन्म हो सकता है। राजनीतिक पर्यवेक्षक भी मोदी-हुड्डा मुलाकात के बाद आए दहिया के बयान को किसी बड़े राजनीतिक धमाके से कम नहीं मान रहे।

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