महान कवि चंद्रकांत देवताले जी का सोमवार की देर रात निधन

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मध्यप्रदेश। महान कवि चंद्रकांत देवताले का सोमवार देर रात निधन हो गया। देवताले जी 81 वर्ष के थे, पर वे पिछले १ महीने से बीमार चल रहे थे, और पिछले कुछ समय से अस्पताल में भर्ती थे।

7 नवंबर 1936 को मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के जौलखेड़ा में देवताले जी का जन्म हुआ था। देवताले जी की प्रारंभिक शिक्षा इंदौर से ही हुई थी। हिंदी में एमए करने के बाद उन्होंने मुक्तिबोध पर पीएचडी की थी। वह इंदौर में एक कॉलेज से शिक्षक के रूप में सेवानिवृत्त होकर स्वत: लेखन कार्य कर रहे थे।

देवताले जी को साहित्य अकादमी सम्मान के अलावा मध्यप्रदेश शिखर सम्मान तथा मैथिली शरण गुप्त सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। उनकी चर्चित कृतियों में ‘रौशनी के मैदान के उस तरफ‘, ‘पत्थर फेंक रहा हूं,’ ‘ हड्डियों में छिपे ज्वार‘, भूखंड तप रहा है, हर चीज़ आग में बताई गई थी, पत्थर की बैंच, इतनी पत्थर रोशनी, तथा अन्य कृतियां शामिल हैं। देवताले जी की कविता में समय और सन्दर्भ के साथ ताल्लुकात रखने वाली सभी सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक प्रवृत्तियां समाई थी। उनकी कविता में समय के सरोकार के साथ-साथ समाज के सरोकार भी मौजूद हैं।

सम्मान की बात करें तो देवताले जी को कविता समय सम्मान (2011), पहल सम्मान (2002), भवभूति अलंकरण (2003), शिखर सम्मान (1986), माखनलाल चतुर्वेदी कविता पुरस्कार और सृजन भारती सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। इस दौरान देवताले जी के निधन पर भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक लीला धर मंडलोई, विष्णु खरे, विष्णु नागर, मंगलेश डबराल ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

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