लकवाग्रस्त महिला को थ्रोम्बोलाइसिस तकनीक से मिली नई जिंदगी

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न्यूज़ एनसीआर, फरीदाबाद। बदलती जीवनशैली में लकवा रोग तेजी से बढ़ रहा है। बड़े ही नहीं बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक लकवा रोक की मुख्य वजह तनाव ग्रस्त जीवन है, जिससे आज यह रोग तेजी से बढ़ रहा है। बीमारी बढ़ने के साथ ही शहर के अस्पतालों में इसका पूर्ण इलाज उपलब्ध है। सेक्टर 16ए स्थित मेट्रो अस्पताल में डॉक्टर रोहित गुप्ता की टीम ने विश्व की नवीनतम तकनीक थ्रबोलाइसिस (इंजेक्शन विधि) से एक महिला को पूर्णत: ठीक कर नया जीवन दिया है। इस तकनीक से अब तक 250 से अधिक मरीजों का सफल इलाज किया जा चुका है।

अस्पताल के न्यूरोलोजी विभाग के वरिष्ठ न्यूरोलाजिस्ट डा.रोहित गुप्ता ने बताया कि थ्रोम्बोलाइसिस इंजेक्शन आटरी में थक्के को घोल देता है और मस्तिष्क की धमनी में रक्त प्रभाव एक बार फिर सामान्य हो जाता है व लकवा ग्रस्त मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है। इस तकनीक से इलाज के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है। उन्होंने बताया कि तीव्र स्ट्रोक या लकवाग्रस्त किसी भी उम्र में हो सकता है।

थ्रोम्बोलाइसिस की यह तकनीक लकवा होने के साढ़े चार घटे तक की जा सकती है। लेकिन इसके लिए तीव्र स्ट्रोक/लकवाग्रस्त मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंच जाना चाहिए, क्योंकि जल्दी उपचार मिलने पर इसके परिणामों काफी अच्छे होते हैं। मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाता है। वरिष्ठ न्यूरोलाजिस्ट डा. गुप्ता ने कहा कि थ्रोम्बोलाइसिस तकनीक के बारे में लोगों में जागरूकता का आभाव है। इसलिए लोगों को अधिक से अधिक जागरुक करने की जरुरत है।

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