राष्ट्रीय प्रसारण दिवस : रेडियो प्रसारण के 90 वर्ष हुए पूरे

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न्यूज़ एनसीआर, फरीदाबाद। राष्ट्रीय प्रसारण दिवस भारत में मनाया जाने वाला राष्ट्रीय दिवस है। भारत में रेडियो प्रसारण शुरू होने के उपलक्ष्य में यह दिवस मनाया जाता है। भारत के राष्ट्रीय प्रसारक के रूप में आल इंडिया रेडियो जनता को सूचित, शिक्षित और मनोरंजन करने के लिए सेवा कर रहा है। यह शुरुआत से ही अपने उद्देश्य “बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय” का अनुसरण कर रहा है। 23 जुलाई 1927 यानी आज से नब्‍बे वर्ष पहले आज ही के दिन भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत हुई थी। एक अद्भुत उपकरण, एक अद्भुत तकनीक “रेडियो”, जिसने सभी आयु-वर्ग के लोगों के जीवन पर अपना गहरा असर डाला। प्रसारण के उस शुरूआती रूप से लेकर आज तक रेडियो ने लंबा सफर तय किया है। भारत में रेडियो का मतलब रहा है ‘आकाशवाणी’। और उसकी सिग्‍नेचर ट्यून भी अदभुत और रोमांचक है।

नजदीक से जाने रेडियो के इस सफर को

आकाशवाणी के गौरवशाली सफर में आपने कितने ऐतिहासिक पल जिए हैं। लाइव कॉमेन्‍ट्रीज़ में भारत का हॉकी ओलंपिक विजेता बनना, राकेश शर्मा की अंतरिक्ष यात्रा, आज़ादी की रात, जवाहर लाल नेहरू का ‘ट्रिस्‍ट विथ डेस्टिनी’ वाला भाषण। बच्‍चों के कार्यक्रम, युववाणी, शास्‍त्रीय संगीत आदि आदि। याद कीजिये मरफी के उस वॉल्‍व वाले रेडियो को, जिसे शुरू होने में वक्‍त लगता था। अब एप्‍लीकेशन के रूप में रेडियो मोबाइल में ही है। इसके साथ ही नेट स्‍ट्रीमिंग के ज़रिये आज दुनिया के कोने-कोने में सुना जा रहा है। रेडियो ने मनोरंजन की परिभाषा को बदला है। रेडियो ने आपको ये इजाज़त दी है कि आप अपने काम में लगे रहते हुए भी उससे जुड़े रहें। रेडियो ने लंबे सफर को आसान किया है। जाने कितनी यूनिवर्सिटीज़ के हॉस्‍टल के कमरों में गूंजा है रेडियो। वो हमसफर है, दुख बांटने वाला है, हिम्‍मत बंधाने वाला है, मुसीबत के दौर का साथी है। आज रेडियो प्रसारण के नब्‍बे बरस पूरे होने पर हम रेडियो को सलाम करते हैं।

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