भारत में 17 सालों से बिना किसी पासपोर्ट और वीजा के रह रहा रशियन मूल का नागरिक

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देहरादून | उत्तरकाशी जिले से एक विदेशी नागरिक को इंटेलिजेंस और स्थानीय पुलिस ने ग्रिफ्तार किया। यह विदेशी नागरिक बिना पासपोर्ट और वीजा के पिछले 17 सालों से भारत में ही रह रहा है।

प्रशासन ने बताया की यह नागरिक रशियन मूल का है, और ये यमुना नदी के किनारे नौगाँव की और एक निर्जन स्थान पर रह रहा है। जब इस व्यक्ति से पासपोर्ट और वीजा दिखने के लिए प्रशासन अधिकारी ने कहा तो उसने कुछ दस्तावेज दिखाए जिसमे से एक वर्ल्ड पासपोर्ट (वर्ल्ड सर्विस अथॉरिटी वॉशिंगटन डीसी द्वारा जारी) जिसमें WSA द्वारा भारत के लिए वीसा के स्थान पर रेसिडेंस परमिट चस्पा किया गया है।

उसने बताया की ये पासपोर्ट वसा शरणार्थियों को जारी करता है, इसलिए पुलिस उस व्यक्ति को संदिग्ध की नजर से देखते हुए उसे ग्रिफ्तार कर लिया।
पूछताछ करने पर विदेशी ने बताया कि ये पासपोर्ट WSA शरणार्थियों को जारी करता है। प्राप्त दस्तावेजों के संदिग्ध प्रतीत होने पर पुलिस ने विदेशी को गिरफ्तार कर लिया है।

 

विदेशी से पूछताछ करने पर उसने बताया गया कि वह 1999 में USSR के पासपोर्ट पर स्टूडेंट वीसा पर भारत आया था जिसपर FRO अहमदाबाद में पंजीकृत हुआ और लगभग एक वर्ष बाद वृन्दावन (मथुरा) आ गया। यहां ISKON से जुड़ा और बीते लगभग 17 वर्षों में अधिकतर वृन्दावन में ही रहा। वर्ष 2003 में पासपोर्ट की वैधता समाप्त होने के बाद भी लगातार मार्च 2017 तक अवैध रूप से वृन्दावन में ही रहा। वर्ष 2013 में उसके एक रशियन मित्र के जरिये उसने ऑनलाइन प्रक्रिया से वर्ल्ड पासपोर्ट के लिए पत्राचार किया जिसपर उसे धर्मशाला (जहां विदेशी गर्मियों में आया करता था) में ये डाक से प्राप्त हुआ। इस विदेशी से जहां स्थानीय खुफिया एजेंसी पूछताछ कर रही है। वहीं अन्य बड़ी खूफिया एजेंसियां भी अपने स्तर से जानकारी जुटा रही हैं।

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