अगले वर्ष तक जीएसटी में 2 करोड़ प्रतिष्ठानों के जुड़ने की सम्भावना : कैट

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न्यूज़ एनसीआर, फरीदाबाद। व्यापारियों के शीर्ष संगठन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने बुधवार को बताया की जीएसटी स्वयं में एक समग्र कर सुधार है और इसको केवल कर प्रणाली को ठीक करने की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। कुछ समय के बाद जीएसटी के कारण से देश की अर्थव्यवस्था में अनेक बुनियादी परिवर्तन होने की बड़ी सम्भावना है। उम्मीद है की अगले वर्ष तक जीएसटी में लगभग 2 करोड़ व्यावसायिक प्रतिष्ठान जुड़ेंगे जिसके चलते जीएसटी कर का दायरा बेहद विकसित होगा। जिससे आयकर की दरें भी कम होने की सम्भावना है। कर का दायरा विकसित होने से जहाँ केंद्र एवं राज्य सरकारों के राजस्व में वृद्धि होगी वहीँ दूसरी ओर बड़ी मात्रा में अनौपचारिक व्यापार औपचारिक रूप में तब्दील होगा !

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा की नेशनल सैंपल सर्वे आर्गेनाईजेशन के वर्ष 2015 -16 के सर्वे के मुताबिक देश के गैर कॉर्पोरेट क्षेत्र में 6 .34 करोड़ छोटे व्यावसायी हैं। जीएसटी कानून में न केवल माल एवं सेवा की आपूर्ति बल्कि व्यापार के दौरान किसी भी प्रकार की बिक्री, ट्रांसफर, एक्सचेंज, बार्टर, रेंट, लीज, लाइसेंस अथवा डिस्पोजल या माल अथवा सेवा का आयत जीएसटी कर दायरे में आएगा ! इस परिभाषा से जीएसटी का दायरा काफी विस्तृत रूप से विकसित हो गया है। पहले के कानून में एक्साइज अथवा वैट कानून में माल की बिक्री या सर्विस टैक्स कानून में सेवा की अदायगी ही केवल कर के दायरे में आती थी। उपरोक्त परिभाषा के आधार पर ऐसा कोई भी प्रतिष्ठान अथवा व्यक्ति जिसकी सभी स्रोतों से भारत भर में वार्षिक टर्नओवर यदि 20 लाख रुपये से अधिक है तो उसे जीएसटी में पंजीकरण करना अनिवार्य है। इस आधार पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान, व्यक्ति, एसोसिएशन, एनजीओ, सोसाइटी, एजेंट, ब्रोकर, कमीशन एजेंट, मकानमालिक, बैंक, वित्तीय संस्थान, कंसलटेंट, चार्टर्ड अकाउंटेंट, विशेषज्ञ, चार्टर्ड इंजीनियर, ई कॉमर्स पोर्टल आदि सभी शामिल है।

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक लगभग 80 लाख प्रतिष्ठानों को जीएसटी में माइग्रेट होना था जिसमें से लगभग 70 लाख हो चुके हैं और लगभग 7 लाख नए पंजीकरण अब तक हुए हैं। जीएसटी नेटवर्क का पोर्टल नए पंजीकरणों के लिए खुला हुआ है और उम्मीद है की अगले वर्ष तक लगभग 2 करोड़ व्यवसायी जुड़ जाएंगे।

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