विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में हुआ भव्य काव्य कल्लोल का आयोजन

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सौरभ मुद्गिल (फरीदाबाद)। हरियाणा ग्रंथ अकादमी पंचकुला एवं संस्कार भारती फरीदाबाद इकाई के संयुक्त तत्वाधान में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वैचारिक काव्य गोष्ठी का आयोजन फरीदाबाद सेक्टर 16 स्थित मैगपाई होटल में किया गया। इस अवसर पर काव्य विधा के द्वारा पर्यावरण के सरंक्षण एवं संवर्धन का सन्देश दिया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. अशोक मधुप ने की, इसके अलावा मुख्य आगंतुक, अतिविशिष्ट एवं विशिष्ट आगंतुकों की श्रेणी में श्री राकेश गंगाना, श्री नरेश वर्मा, श्री विनय विनम्र शुक्ल, श्री भूपेंद्र भरतपुरी, श्री इब्राहिम अल्वी, श्री नवीन गौतम एवं श्री कालीशंकर सौम्य आदि मौजूद रहे। काव्या गोष्ठी का मंच संचालन श्री समोद सिंह चरौरा ने किया। कार्यक्रम में हरियाणा ग्रंथ अकादमी के निदेशक डॉ. विष्णु दत्त शर्मा की गरिमामय उपस्थिति रही।
विश्व पर्यावरण के उपलक्ष्य में काव्य कलोल के द्वारा विभिन्न कवियों ने अपने काव्य पाठ के से मानव जीवन में वृक्षों के महत्त्व के बारे में बताया।

आधुनिकता के दौर में विकास के नाम पर ख़त्म हो रही वन सम्पदा पर कटाक्ष करते हुए कवि अजय अक्स ने कहा कि ” वो दिन भी अब दूर नहीं मित्र, जब रह जायेंगे कागज पर सिर्फ पेड़ों के चित्र “। इसी क्रम में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हास्य व्यंग कवि दीपक गुप्ता ने कहा कि “कहीं पर नल नहीं मिलता कहीं पर जल नहीं मिलता बहुत उम्मीद है जिसकी वहीँ पर कल नहीं मिलता “।

ध्वनि प्रदूषण पर कटाक्ष करते हुए कवि यशदीप कौशिक ने कहा कि ” उस बेबी का क्या करें जिसको बेस पसंद, बेमतलब के शोर में कान हुए अब बंद “। इसी प्रकार अपनी सुन्दर रचनाओं से कुलदीप बृजवासी एवं अन्य कवियों ने भी सभागार को मन्त्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर मौजूद गणमान्य सदस्य अभिषेक ग़ुप्ता, डॉ. ऋचा गुप्ता, मनोज मनमौजी, पवन पागल, आचार्य प्रकाश चंद्र फुलोरिया, श्रीमती स्वदेश चरौरा एवं श्रीमति दुर्गा सिन्हा आदि मौजूद रहे।

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