लालू को ललन से मिली बेनामी संपत्ति मामले में हस्तक्षेप करें नीतीश : सुशील मोदी

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पटना। बिहार भारतीय जनता पार्टी(भाजपा)विधानमंडल दल के नेता एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से राष्ट्रीय जनता दल(राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की पत्नी एवं पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को ललन चौधरी से मिली करोड़ों की बेनामी संपत्ति मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हुये गुरुवार को कहा कि ललन की वास्तविकता को लेकर बरकरार संशय को ध्यान में रखते हुये उसे बरामद कराकर जनता के सामने लाया जाना चाहिए। श्री मोदी ने यहां कहा कि राजद प्रमुख की पत्नी राबड़ी देवी और परिवार के अन्य सदस्यों को करोड़ों रुपये की जमीन देने वाले नये दानवीर ललन चौधरी को बिहार की जनता देखना चाहती है।  उनकी वास्तविकता को लेकर संशय है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बेनामी सम्पत्ति के इस मामले में हस्तक्षेप कर ललन चौधरी को बरामद कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्री यादव बतायें कि ललन चौधरी ने और किन-किन लोगों को अपनी करोड़ों की जमीन दान की। भाजपा नेता ने कहा कि ललन को सीवान जिले के सियारीगढ़ निवासी सुकठ चौधरी का पुत्र बताया जाता है। उन्होंने कहा कि उसके गांव बड़हरिया में कोई उसे इंटरमीडिएट काउंसिल का कर्मचारी, तो कोई राजद अध्यक्ष की गायों को चारा खिलाने वाला निजी कर्मचारी बताता है। श्री मोदी ने कहा कि कुछ ग्रामीण दावा  करते हैं कि इस नाम का कोई व्यक्ति है ही नहीं, तो कुछ उसकी हत्या हो जाने  की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने श्रीमती राबड़ी देवी को  मकान सहित करोड़ों रुपये की ढ़ाई डिस्मिल जमीन गिफ्ट कर दी, उसकी हकीकत 48 घंटे बाद भी उजागर न होना कई सवाल खड़े करता है।

पूर्व उप मुख्यमंत्री ने सवालिया लहजे में कहा कि लाभ दिलाने के बदले जमीन लिखवाओ  अभियान में लगे श्री यादव के लिए यदि ललन चौधरी एक मुखौटा नहीं है, तो उसे  सामने लाने में क्या कठिनाई है। वे अपनी 1000 करोड़ रुपये की बेनामी सम्पत्ति और कालाधन बचाने के लिए ही नोटबंदी का विरोध करते रहे हैं।

भाजपा नेता ने कहा कि श्री यादव की पुत्री एवं राज्यसभा सांसद  मीसा भारती एवं दामाद शैलेष कुमार पर आयकर विभाग के जुर्माना लगाने और  पूछताछ के लिए सम्मन जारी करने के बाद तो उन्हें पता चल गया होगा कि जिन 22  ठिकानों पर छापा पड़ा था, वे कहां-कहां हैं। उन्होंने कहा कि अब राजद अध्यक्ष को मीडिया से जिन ठिकानों पर छापे पड़े उसका पता पूछने की जरूरत  नहीं पड़ेगी।

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