एक ऐसा मंदिर जहां होती है केसर और चंदन की वर्षा

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हमारा देश चमत्कारों का देश है। हर रोज कई नई और अजीब घटनाएं हमारे देश में होना एक आम बात है। रही बात तीर्थ स्थलों की, लोगों की आस्था ने इन स्थानों न सिर्फ पवित्र बनाया है बल्कि चमत्कारिक भी बनाया है। आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपनी आलौकिक शक्तियों की वजह से जाना जाता है। यह एक ऐसा मंदिर है जहां हर सप्तमी और चौदश को चंदन और केसर की बारिश होती है।

केसर और चंदन की बारिश वाला पवित्र स्थान मुक्तागिरी नामक तीर्थ पर स्थित है, यह स्थान मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की भैंसदेही में थपोड़ा गांव में है। इस स्थान को मुक्तागिरी इसलिए कहा जाता है क्योंकि, यहां मुनीश्वरो तथा महान साधकों ने विशेष आत्म साधना की और सर्व कर्म बन्धनों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त किया।
यहां पर जैन धर्म के दिगंबर संप्रदाय के 52 मंदिर भी स्थित है, जो कि अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। ये मंदिर इस स्थान को खूबसूरत बनाने में अपना अहम योगदान देते हैं।

इस जगह को न सिर्फ यहां की खूबसूरती अनोखी बनाती है बल्कि इससे जुड़ी कहानियां भी इस स्थान का धार्मिक महत्व बढ़ाती हैं। किवदंती है कि प्राचीन समय में इस स्थान पर एक जैन मुनि ध्यान में स्थित थे और उसी समय कहीं से उनके सामने एक मरा हुआ मेढ़क आकर गिरा। मुनि की आंख खुली और उन्होंने उस मरे मेढ़क के कान में “णमोकार” मंत्र पढ़ा, जिसके बाद में वह जीवित होकर देवता बना गया तथा मोक्ष को प्राप्त हो गया। इसी दिन को यहां पर “निर्वाण दिवस” कहा जाता है तथा इस दिन आकाश से देवतागण चन्दन तथा केसर मिश्रित द्रव्य की वर्षा करते हैं, यहां के मंदिरों की प्रतिमाओं पर इस द्रव्य के छीटें लोगों को इस दिन देखने को मिलते हैं। 52 मंदिरों में से 10 मंदिरों में आप यह बारिश साफ देख सकते हैं।

वहीं कुछ लोगों का मानना यह भी है कि इस जगह का नाम पहले मेंडागिरी हुआ करता था लेकिन उस व्यक्ति की मौत के बाद उसे मुक्ति मिली और इस जगह का नाम मुक्तागिरी पड़ गया।

इन कहानियों के अनुसार इस जगह की बहुत मान्यता है। दूर-दूर से लोग चन्दन और केसर की बारिश देखने के लिए यहां आते हैं। इस जगह के इतिहास में मेंडागिरी पर्वत को बहुत पवित्र माना गया है। इस स्थान को देखने के लिए लोग दूर-दूर से यहां आते हैं।

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